तमिलनाडु के वात्राप में स्थित नल्लथांगल मंदिर का अभिषेक उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद, कड़ी सुरक्षा के साथ सम्पन्न हुआ। दो पड़ोसियों की आपसी झगड़े के कारण क्षतिग्रस्त मूर्तियों को बदलने की प्रक्रिया को अदालत ने नियंत्रित किया।

तमिलनाडु के राजापलायम के पास स्थित वात्राप गाँव में स्थित नल्लथांगल मंदिर का अभिषेक 9 जुलाई 2026 को बड़े सुरक्षा इंतजामों के तहत संपन्न हुआ। यह धार्मिक अनुष्ठान उच्च न्यायालय के आदेश के बाद किया गया, क्योंकि जनवरी 2025 में पुराने देवालय की मूर्तियों को तोड़‑फोड़ कर क्षति पहुंचाई गई थी।

पृष्ठभूमि एवं कानूनी संघर्ष

नल्लथांगल मंदिर के दो प्रमुख पड़ोस – अर्जुनापुरम और अनाइकैरैपट्टी – के बीच नई मूर्तियों की स्थापना को लेकर मतभेद उत्पन्न हो गया। अनाइकैरैपट्टी के लोगों ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिससे मंदिर प्रशासन को अदालत की कार्यवाही का सामना करना पड़ा। न्यायालय ने दोनों पक्षों को एक साथ मिलकर अभिषेक में भाग लेने का निर्देश दिया, ताकि सामाजिक सौहार्द पुनर्स्थापित हो सके।

अभिषेक समारोह की रूप‑रेखा

सुरक्षा के मद्देनज़र, पुलिस ने सख्त कड़ी सुरक्षा तैनात की, जबकि स्थानीय प्रशासन ने हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एण्डवमेंट्स (HR & CE) विभाग की सहयोगी टीम को कार्यवाही में शामिल किया। अभिषेक के दौरान पवित्र जल को भक्तों पर छिड़का गया, जिससे माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। नयी स्थापित मूर्ति को स्थापित करने के बाद, पूरे रात भर पूजा‑पाठ एवं मंत्रोच्चार किया गया।

उपस्थिति और सामाजिक प्रभाव

राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इस अभिषेक में भाग लिया। श्रीविलिपुट्टूर के विधायक कार्तिक, स्थानीय मंदिर प्रबंधक देवी और अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने समारोह में सम्मिलित होकर समर्थन व्यक्त किया। इस कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक एकता को सुदृढ़ किया, बल्कि समुदाय में शांति और सहयोग की भावना को भी पुनर्स्थापित किया।

भविष्य की दिशा

अभिषेक के बाद, स्थानीय प्रशासन ने मंदिर के रख‑रखाव, सुरक्षा और भविष्य में संभावित विवादों को रोकने के लिए एक नियमित निगरानी समिति स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम न केवल धार्मिक धरोहर की सुरक्षा करेगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी दीर्घकालिक रूप से संरक्षित करेगा।