राम मंदिर के दान गिनती दल में लगभग दो दर्जन कर्मचारियों ने एक साथ इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने वेतन में कटौती, कार्य घंटे में वृद्धि और अवकाश में कमी का आरोप लगाया है, जबकि विशेष जांच टीम (SIT) मामले की जाँच जारी रखी हुई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • लगभग 24 दान गिनती कर्मचारियों ने इस्तीफ़ा दिया
  • शिकायतें: वेतन में कटौती, शिफ्ट 6 से 9 घंटे बढ़ी
  • सिट (SIT) की जांच जारी, कई वरिष्ठ अधिकारी भी पद से हटे

अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हाल ही में दान गिनती टीम में बड़े पैमाने पर बदलाव देखे हैं। लगभग दो दर्जन कर्मचारी, जो मंदिर के दान की गिनती और रिकॉर्डिंग के लिए जिम्मेदार थे, ने एक साथ इस्तीफ़ा दे दिया। वेतन में कटौती, कार्य घंटे में वृद्धि और अवकाश की संख्या में कमी के आरोपों ने इस कदम को प्रेरित किया।

पृष्ठभूमि और जांच की स्थिति

जून 2026 में दान गिनती में अनियमितताओं की रिपोर्ट मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की। इस जांच ने प्रारम्भिक तौर पर गबन के प्रमाण पाए और कई लोगों को गिरफ्तार किया। इस दौरान ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी, जिनमें चैम्पट राय और अनिल मिश्रा शामिल थे, ने भी अपने पदों से इस्तीफ़ा दिया।

कर्मचारियों के आरोप

कर्मचारियों ने बताया कि पहले दो शिफ्टों में काम बाँटा जाता था, जिससे दैनिक कार्य समय लगभग छह घंटे रहता था। अब सभी को एक ही शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है, जिससे कार्य समय नौ घंटे तक बढ़ गया है। साथ ही, वेतन में विभिन्न स्तरों पर कटौती की गई है, जबकि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन मिल रहा है। मासिक अवकाश के दिन भी कम कर दिए गए हैं, जिससे काम करने की स्थितियों में तनाव बढ़ गया।

ट्रस्ट के सुधार कदम

इन घटनाओं के बाद ट्रस्ट ने जुलाई 22 से शुरू होने वाले व्यापक सुधारों की घोषणा की है। नई नीतियों में दान प्रबंधन, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और दर्शन प्रणाली को पारदर्शी बनाना शामिल है। ट्रस्ट ने रमनंदी संप्रदाय के संतों और विद्वानों से सलाह ली है, ताकि नए प्रावधान भक्तों के लिए अधिक सुलभ और न्यायसंगत हों।

भविष्य की दिशा

नए कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया कड़ी पृष्ठभूमि जाँच के साथ जल्द ही शुरू होगी, लेकिन इसे समय लग सकता है। साथ ही, जांचकर्ताओं ने यह भी उजागर किया है कि ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठों ने डिजिटल आईडी का दुरुपयोग कर अनधिकृत वीआईपी दर्शन पास जारी किए थे, जिससे भ्रष्टाचार के नए पहलू सामने आए हैं। इन खुलासों के बाद, ट्रस्ट को न केवल प्रशासनिक बल्कि नैतिक रूप से भी अपने आप को पुनर्स्थापित करना होगा।