एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने खुलासा किया है कि वायनाड में हुई विनाशकारी तबाही केवल भारी बारिश का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे जटिल भूगर्भीय संरचनाएं भी जिम्मेदार थीं।

मुख्य बिंदु

  • 48 घंटों में 573 मिमी अत्यधिक बारिश ने आपदा को सक्रिय किया।
  • प्राचीन चट्टानों की आंतरिक कमजोरी और दरारें तबाही का मुख्य कारण बनीं।
  • मलबे के प्रवाह ने 8 किमी की दूरी तय की और भारी विनाश किया।
  • वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु और भूविज्ञान का घातक मेल बताया है।

वायनाड में जुलाई 2024 में हुई भीषण भूस्खलन की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र के अनुसार, यह आपदा केवल अत्यधिक मानसूनी बारिश का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसमें भूगर्भीय (Geological) और भू-आकृतिक (Geomorphological) कारकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

केरल विश्वविद्यालय, IISER मोहाली और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि अत्यधिक भारी बारिश (लगभग 573 मिमी) ने एक 'ट्रिगर' का काम किया, लेकिन भूस्खलन की तीव्रता और उसके मार्ग को वहां की चट्टानी संरचनाओं ने निर्धारित किया। यह आपदा पुन्नापुझा नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में शुरू हुई और एक उच्च गति वाले मलबे के प्रवाह में बदल गई, जिसने मुंडक्कई और चूरालमला जैसे क्षेत्रों को तहस-नहस कर दिया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह अध्ययन भविष्य में पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह समझना आवश्यक है कि केवल बारिश का डेटा पर्याप्त नहीं है; मिट्टी की गहराई और चट्टानों की संरचना को समझना भी उतना ही अनिवार्य है।

अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु और भूविज्ञान के बीच का अंतर्संबंध ही इस आपदा की भयावहता का असली कारण था।

शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रभावित क्षेत्र की पहाड़ियों में प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानें मौजूद हैं, जिनमें सदियों से दरारें और कमजोर क्षेत्र (Shear Zones) बने हुए थे। बारिश का पानी इन दरारों में रिसकर कठोर चट्टानों को धीरे-धीरे नरम मिट्टी में बदल देता है। जब पानी का दबाव चट्टानों की सहनशक्ति से अधिक हो गया, तो एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया।

तबाही का क्रम: एक तुलनात्मक विश्लेषण

कारकभूमिका
अत्यधिक वर्षातत्काल ट्रिगर (Immediate Trigger)
चट्टानी संरचनाविनाश की सीमा और मार्ग का निर्धारण
घाटी का आकारमलबे के प्रवाह की गति और शक्ति को बढ़ाना

अध्ययन में यह भी बताया गया कि कैसे घाटी के संकीर्ण हिस्सों में मलबे ने अस्थायी बांध बना लिए थे, जिनके फटने से पानी और मलबे का एक शक्तिशाली ज्वार नीचे की ओर आया, जिससे विनाश और भी बढ़ गया।

क्या आप जानते हैं?: वायनाड भूस्खलन का मलबा लगभग 8 किलोमीटर की दूरी तक फैला था और इसने 768 मीटर की ऊंचाई से नीचे की ओर प्रहार किया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: वायनाड भूस्खलन का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: मुख्य कारण 48 घंटों में हुई अत्यधिक भारी बारिश और पहाड़ियों की कमजोर भूगर्भीय संरचना का मेल था।

प्रश्न 2: इस अध्ययन में किन संस्थानों ने भाग लिया?
उत्तर: इस अध्ययन में केरल विश्वविद्यालय, IISER मोहाली और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भाग लिया।