राष्ट्रीय केंद्र भूकम्प विज्ञान (NCS) ने बताया कि 5:05 एएम IST पर बंगाल की खाड़ी में 4.5 रिच्टर स्केल का मध्यम भूकंप दर्ज हुआ। इसका केन्द्र बिंदु 16.805° N, 84.381° E पर 10 km की गहराई में था और अभी तक कोई क्षति या घायल नहीं हुआ।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भूकंप की तीव्रता 4.5, गहराई 10 km
  • केन्द्र बिंदु काकीनाडा से 227 किमी पूर्व, विसाखापत्तनम के निकट
  • कोई रिपोर्टेड क्षति या चोट नहीं, हल्की कंपन महसूस हुई

राष्ट्रीय केंद्र भूकम्प विज्ञान (NCS) ने रविवार, 12 जुलाई 2026 को सुबह 5:05 एएम IST पर बंगाल की खाड़ी में 4.5 रिच्टर स्केल का मध्यम भूकंप दर्ज किया। यह भूकंप 10 km की सतह के नीचे उत्पन्न हुआ और इसका भौगोलिक केन्द्र बिंदु 16.805° उत्तरी अक्षांश और 84.381° पूर्वी देशांतर पर स्थित था।

भौगोलिक स्थिति और प्रभावित क्षेत्र

केन्द्र बिंदु काकीनाडा से लगभग 227 किमी पूर्व और राजहमुंद्री से 275 किमी पूर्व में स्थित है, जिससे यह भूकंप मुख्यतः समुद्र में ही रहा। ओडिशा के बहरामपुर से 282 किमी दक्षिण और पुरी से 367 किमी दक्षिण‑दक्षिणपश्चिम तथा छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से 355 किमी दक्षिण‑पूर्व तक इस कंपन की रिपोर्ट मिली। विसाखापत्तनम के निवासी, विशेषकर एमवीपी कॉलोनी, पेडावाल्टायर, गजुवाका, येंदादा और अरिलोवा क्षेत्रों में कुछ सेकंड के लिए हल्की हलचल महसूस कर चुके हैं।

इतिहास और भूवैज्ञानिक संदर्भ

बंगाल की खाड़ी भारत-श्रीलंका प्लेट के टेक्टोनिक सीमा के पास स्थित है, जहाँ पूर्वी हिमालयी फॉल्ट और इंडो‑ऑस्ट्रेलियन प्लेट के टकराव के कारण समय‑समय पर भूकंपीय गतिविधि होती रहती है। पिछले दो दशकों में इसी क्षेत्र में 5.0‑6.0 तीव्रता के कई भूकंप हुए हैं, जिनमें 2001 में 7.7 का भयंकर भूकंप भी शामिल है, जिसने बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई थी। इस प्रकार, 4.5 की तीव्रता वाला यह भूकंप, यद्यपि समुद्र में हुआ, लेकिन तटीय शहरों के लिए सतर्कता का संकेत देता है।

प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय

भूकंप के बाद NCS ने इसे “Reviewed” वर्गीकृत किया, जिसका अर्थ है कि डेटा की पुष्टि हो गई है और आगे की निगरानी जारी रहेगी। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को अस्थायी रूप से खिड़कियों से दूर रहने, भारी वस्तुओं को सुरक्षित रखने और आपातकालीन निकास मार्गों की जाँच करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में समान गहराई पर अधिक तीव्रता वाले भूकंप आएँ, तो तटीय बुनियादी ढाँचे पर प्रभाव पड़ सकता है।

भविष्य की संभावनाएँ

विज्ञानियों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में निरंतर मॉनिटरिंग आवश्यक है, क्योंकि यहाँ की टेक्टोनिक सेटिंग्स नई भूकंपीय लहरों के उत्पन्न होने की संभावना रखती है। NCS ने तटीय क्षेत्रों के लिए विशेष चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की योजना पर काम शुरू किया है, जिससे समय पर सूचना प्रसारित कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।