फीफा के अध्यक्ष गीनी इन्फैंटो ने 64‑टीम वाले विश्व कप की संभावित योजना पेश की, जबकि 2026 संस्करण में जलवायु ब्रेक को लेकर उठे प्रश्नों का उन्होंने समर्थन किया। यह कदम फुटबॉल के वैश्वीकरण और छोटे देशों की भागीदारी को नई दिशा दे सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- इन्फैंटो 64‑टीम विश्व कप की संभावना पर संकेत
- 2026 में जलवायु (हाइड्रेशन) ब्रेक को समर्थन
- छोटे राष्ट्रों की भागीदारी से प्रतियोगिता का स्तर बढ़ेगा
फीफा के अध्यक्ष गीनी इन्फैंटो ने हाल ही में स्विट्ज़रलैंड की ब्लू स्पोर्ट टेलीविजन को दी गई साक्षात्कार में बताया कि भविष्य में विश्व कप का आकार 64 टीमों तक बढ़ाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। यह बयान तब आया जब 2026 का विश्व कप, जो संयुक्त राज्य, कनाडा और मेक्सिको में आयोजित हो रहा है, पहले ही 48‑टीम फॉर्मेट में सफलतापूर्वक चल रहा है।
इतिहास और वर्तमान संदर्भ
पहले 1930 में केवल 13 टीमों के साथ शुरू हुआ विश्व कप, 1998 में 32‑टीम फॉर्मेट तक पहुँचा, और 2026 में 48‑टीम में विस्तारित किया गया। यह विस्तार प्रारम्भिक रूप से कई आलोचनाओं का शिकार रहा, क्योंकि कुछ ने कहा कि इससे प्रतियोगिता का स्तर घटेगा और बड़े देशों को आसान जीत मिल सकती है। फिर भी, 2026 के टूर्नामेंट में कैप वर्दे और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे छोटे देशों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिससे आलोचक चकित हुए।
विश्व कप को 64 टीमों तक बढ़ाने के संभावित लाभ
इन्फैंटो ने कहा, “जब आप विश्व कप आयोजित करते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए होना चाहिए, केवल यूरोप और दक्षिण अमेरिका के लिए नहीं।” 64‑टीम फॉर्मेट से छोटे फुटबॉल राष्ट्रों को अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे वे अपनी राष्ट्रीय टीमों में निवेश करने और युवा प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रेरित होंगे। अफ्रीकी महाद्वीप का उदाहरण स्पष्ट है: 2026 में 10 में से 9 अफ्रीकी टीमें नॉकआउट चरण में पहुंची, जबकि पिछले टूर्नामेंट में केवल पाँच ही पहुंच पाई थीं। यह वृद्धि दर्शाती है कि अधिक प्रतिनिधित्व से प्रतियोगिता की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
जलवायु (हाइड्रेशन) ब्रेक पर इन्फैंटो की रक्षा
2026 के मैचों में प्रत्येक आधे में एक जलवायु ब्रेक लागू किया गया, जिससे कुल दो ब्रेक होते हैं। आलोचक इस कदम को विज्ञापन राजस्व बढ़ाने के बहाने के रूप में देखते थे। इन्फैंटो ने स्पष्ट किया, “यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर बहुत बहस होती है, लेकिन हमें सभी टीमों को समान परिस्थितियों में खेलने का अवसर देना चाहिए।” उन्होंने पिछले साल यूएसए में आयोजित क्लब विश्व कप के दौरान “कूलिंग ब्रेक” के सफल प्रयोग का भी हवाला दिया, जहाँ लगभग 60% मैचों में उच्च तापमान के कारण ब्रेक दिया गया।
टिकट कीमतों और द्वितीयक बाजार का प्रभाव
टिकट कीमतों को लेकर भी इन्फैंटो ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने पहले से ही कीमतें निर्धारित की थीं और वर्तमान में ये कीमतें द्वितीयक बाजार में चार‑पांच गुना अधिक बिक रही हैं, जो दर्शाता है कि मूल कीमतें बहुत अधिक नहीं थीं।
यदि 64‑टीम फॉर्मेट को अपनाया जाता है, तो फुटबॉल का वैश्विक दायरा और आर्थिक प्रभाव दोनों ही विस्तार पाएंगे, जिससे इस खेल की लोकप्रियता और प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन दोनों में नई ऊँचाइयाँ छूने की संभावना है।