बिहार के झंडू कुमार ने ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेलों के पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए पदक तालिका में खाता खोला। गरीबी से जूझने वाले इस एथलीट की सफलता की कहानी भावुक कर देने वाली है।

मुख्य बातें

  • झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीता।
  • उन्होंने 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाकर 130.9 अंक प्राप्त किए।
  • बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले झंडू का परिवार बेहद गरीब है।
  • कोच जे.पी. सिंह ने सरकार से उनके लिए नौकरी की मांग की है।

ग्लासगो के स्कॉटिश इवेंट कैंपस में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक पल आया जब झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक सुनिश्चित किया। बिहार के नालंदा जिले के एक साधारण परिवार से आने वाले झंडू ने अपनी ताकत और अटूट संकल्प से दुनिया को प्रभावित किया है।

झंडू ने 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम के भार को सफलतापूर्वक उठाकर कुल 130.9 अंक अर्जित किए। इस उपलब्धि के साथ ही उन्होंने नाइजीरिया के इड्रिस रिलुवान (स्वर्ण) और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग (रजत) के बाद तीसरा स्थान हासिल किया। झंडू की इस जीत के पीछे वर्षों का संघर्ष और त्याग छिपा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, झंडू कुमार की यह जीत केवल एक पदक नहीं है, बल्कि यह भारत के जमीनी स्तर के खेल विकास और पैरा-एथलीटों के संघर्ष की कहानी बयां करती है। एक सब्जी विक्रेता के बेटे से लेकर अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता बनने तक का सफर प्रेरणा का प्रतीक है।

"झंडू को उनकी कड़ी मेहनत के लिए उचित पुरस्कार और सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। वह इसके हकदार हैं।" - जे.पी. सिंह, हेड कोच

झंडू का बचपन अभावों में बीता। परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने ई-रिक्शा तक चलाया। उनकी किस्मत तब बदली जब पैरालंपिक पदक विजेता राजिंदर सिंह राहेलू ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें गांधीनगर स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण के लिए भेजा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

झंडू कुमार पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा चुके हैं। उन्होंने 2024-25 में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए 72 किग्रा वर्ग में 205 किग्रा का सर्वश्रेष्ठ लिफ्ट किया था। इसके अलावा, उन्होंने 2025 के बीजिंग पैरा पावरलिफ्टिंग विश्व कप में भी कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की थी।

क्या आप जानते हैं?: झंडू कुमार ने अपनी ट्रेनिंग के दौरान न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक मजबूती पर भी विशेष ध्यान दिया, जो उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: झंडू कुमार ने कितने अंक प्राप्त किए?
उत्तर: झंडू ने 181kg और 190kg भार उठाकर कुल 130.9 अंक प्राप्त किए।

प्रश्न 2: झंडू कुमार कहाँ के रहने वाले हैं?
उत्तर: वह बिहार के नालंदा जिले के हरनौत के रहने वाले हैं।