भारतीय रक्षा विज्ञान ने पिनाका लांग-रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR) को 60 किलोमीटर की निर्धारित न्यूनतम दूरी पर ‘टेक्स्टबुक प्रिसिशन’ के साथ सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण एआरडीई और हाई एनर्जी मैटरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी के सहयोग से विकसित किया गया है।

भारत ने अपने स्वदेशी रॉकेट प्रणाली पिनाका LRGR (लांग‑रेंज गाइडेड रॉकेट) का एक महत्वपूर्ण परीक्षण किया, जिसमें लक्ष्य पर 60 किमी की न्यूनतम दूरी पर शून्य त्रुटि के साथ हिट किया गया। यह सफलता न केवल भारतीय रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करती है, बल्कि विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पिनाका प्रणाली का विकास और महत्व

पिनाका रॉकेट प्रणाली का मूल विकास आर्मामेंट रिसर्च एंड डिवेलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) ने किया, जबकि हाई एनर्जी मैटरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी (HEMRL) ने उन्नत प्रोपेलेंट और गाइडेंस तकनीक प्रदान की। पिनाका को पहले 40 किमी तक की दूरी के लिए डिजाइन किया गया था, परन्तु LRGR संस्करण ने इस सीमा को 60 किमी से 70 किमी तक बढ़ा दिया, जिससे इसका उपयोग बड़े क्षेत्रों में कवरेज प्रदान करने के लिए उपयुक्त हो गया।

परीक्षण की तकनीकी विशिष्टताएँ

परीक्षण में रॉकेट को ‘यूज़र‑डिफाइन्ड’ न्यूनतम दूरी पर सेट किया गया, जिसका अर्थ है कि ऑपरेटर स्वयं लक्ष्य की दूरी निर्धारित कर सकता है। इस परीक्षण में रॉकेट ने उन्नत इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और जीपीएस‑आधारित गाइडेंस का प्रयोग किया, जिससे लक्ष्य तक पहुँचने में 0.2% से कम त्रुटि रही। इस प्रकार की प्रिसिशन, विशेषकर जमीनी बलों के लिए ‘इंडिपेंडेंट फायर सपोर्ट’ प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

रणनीतिक प्रभाव और भविष्य की योजना

पिनाका LRGR की सफलता भारतीय सेना को तटस्थ एवं तेज़ गति वाले शत्रु स्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता देती है। इस रॉकेट की लम्बी दूरी और सटीकता, भारत की ‘एडवांस्ड बॅटली फील्ड मैनेजमेंट’ (ABFM) प्रणाली के साथ एकीकृत होने पर, बहु‑स्तरीय रक्षा रणनीति को सुदृढ़ करेगी। सरकार ने इस तकनीक को आगे के विकास के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत अतिरिक्त फंडिंग की घोषणा की है, जिससे अगली पीढ़ी के पिनाका मॉडलों में अधिक पेलोड और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएँ जोड़ने की योजना है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय तुलना

पिनाका की पहली बार 2002 में परीक्षण किया गया था, तब से इसे कई बार उन्नत किया गया है। पिछले दशकों में भारत ने ‘अग्नि’, ‘त्रिशूल’, और ‘नाग’ जैसी विभिन्न रॉकेट प्रणालियों को विकसित किया, परन्तु पिनाका LRGR को सबसे अधिक लचीलापन और लागत‑प्रभावशीलता के कारण प्राथमिकता दी गई है। विश्व स्तर पर इस प्रकार के लांग‑रेंज गाइडेड रॉकेट मुख्यतः चीन, रूस और कुछ यूरोपीय देशों के पास हैं, परन्तु पिनाका LRGR की स्वदेशी प्रकृति भारत को रणनीतिक स्वायत्तता प्रदान करती है।

निष्कर्ष

पिनाका LRGR का सफल परीक्षण भारतीय रक्षा विज्ञान में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह न केवल तकनीकी प्रगति को दर्शाता है, बल्कि भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है। आगामी वर्षों में इस प्रणाली के निरंतर सुधार और विस्तृत तैनाती से भारतीय सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।