चेन्नई मेट्रो रेल ने शोरगुल वाले यात्रियों के लिए जुर्माना बढ़ा दिया है। नई संशोधित अधिनियम के तहत अब बिना इयरफ़ोन के संगीत सुनने या तेज़ आवाज़ में बात करने पर ₹2,500 तक का जुर्माना और हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सीएमआरएल ने शोर पैदा करने वाले यात्रियों पर जुर्माना ₹500 से बढ़ाकर ₹2,500 कर दिया।
- नए संशोधन के तहत ध्वनि प्रदूषण के लिए सेक्शन 59 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
- उल्लंघन करने पर इयरफ़ोन उपयोग, हेडफ़ोन पहनना अनिवार्य और मेट्रो परिसर से हटाने की संभावना।
चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) ने सार्वजनिक शांति और यात्रियों के आराम को ध्यान में रखकर एक महत्वपूर्ण नियम बदलाव किया है। 2026 के जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम के तहत अब बिना इयरफ़ोन के संगीत सुनना, स्पीकर का उपयोग करना या तेज़ आवाज़ में बातचीत करना सेक्शन 59 के अंतर्गत दंडनीय माना जाएगा। यह कदम यात्रियों के बीच बढ़ते शोरगुल की शिकायतों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पिछला जुर्माना और नया प्रावधान
पहले, मेट्रो में शोर उत्पन्न करने वाले यात्रियों पर अधिकतम ₹500 का जुर्माना लगाया जाता था। हालिया संशोधन के बाद यह राशि चार गुना बढ़ाकर ₹2,500 कर दी गई है, जिससे उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना बढ़ी है। साथ ही, अधिकारी सीधे यात्रियों को मेट्रो परिसर से बाहर निकालने का अधिकार रखते हैं, जिससे भविष्य में अनावश्यक शोर को रोकने में मदद मिलेगी।
कानूनी ढांचा और सेक्शन 59
मेट्रो रेलवे (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) एक्ट 2002 के सेक्शन 59 में सार्वजनिक व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं। इस सेक्शन को हाल ही में जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2026 ने सुदृढ़ किया है, जिससे मेट्रो प्रबंधन को शोर नियंत्रण में अधिक अधिकार मिलते हैं।
व्यापक सामाजिक प्रभाव
शोर प्रदूषण का असर केवल यात्रा के अनुभव तक सीमित नहीं रहता; यह मानसिक तनाव और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ संगीत और उच्च आवाज़ वाले वार्तालापों को नियंत्रित करने से यात्रियों के बीच सामंजस्य बढ़ेगा और मेट्रो का उपयोग अधिक सुरक्षित एवं आरामदायक बन जाएगा। साथ ही, इस कदम से सार्वजनिक स्थानों में शोर नियंत्रण के लिए एक मिसाल स्थापित होगी।
भविष्य की संभावनाएँ
CMRL ने इस नई नीति को लागू करने के साथ ही यात्रियों को हेडफ़ोन या इयरफ़ोन का उपयोग अनिवार्य करने की सलाह दी है। यदि यह नीति सफल रहती है, तो अन्य भारतीय मेट्रो नेटवर्क भी समान उपाय अपना सकते हैं, जिससे देशभर में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में शोर नियंत्रण का मानक स्थापित हो सकता है।