इज़राइल की आयरन डोम तकनीक अब भारत में बन रही है, जिससे दोनों देशों के रक्षा सहयोग में नई दिशा खुल रही है। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित यह इंटरसेप्टर भारतीय रक्षा उद्योग को उन्नत क्षमताएँ प्रदान करेगा।
इज़राइल की विश्व‑प्रसिद्ध एंटी‑एयरक्राफ्ट प्रणाली आयरन डोम अब भारत में निर्मित होने वाली है, जिससे दो देशों के बीच रक्षा सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। भारत सरकार ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत इस परियोजना को प्राथमिकता दी है, जिससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी बल्कि भारतीय औद्योगिक आधार को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
आयरन डोम ने 2011 में पहली बार परिचालन शुरू किया और तब से यह इज़राइल के लिए रॉकेट और तोपखाने के हमलों को 90% से अधिक सफलता दर से निरस्त करने वाली प्रमुख रक्षा प्रणाली बन गई है। इस तकनीक को भारत में लाने का निर्णय दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा समझौतों, संयुक्त अभ्यासों और तकनीकी साझेदारी पर आधारित है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इज़राइल के साथ कई रक्षा समझौते किए हैं, जिनमें ड्रोन्स, सायबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक जामरन प्रणाली शामिल हैं।
मेक इन इंडिया के तहत उत्पादन
भारत में निर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम (JV) की स्थापना की गई है, जिसमें इज़राइली कंपनी Rafael Advanced Defense Systems और भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम हिंदुस्तान एरोस्पेस लिमिटेड (HAL) प्रमुख साझेदार हैं। इस JV का मुख्यालय नई दिल्ली के निकट स्थित किया गया है, जहाँ एक अत्याधुनिक उत्पादन प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट में रडार, कमांड‑कंट्रोल सॉफ्टवेयर और काइनेटिक एंटी‑मिसाइल इंटीरसेप्टर का असेंबली काम होगा।
आर्थिक और तकनीकी प्रभाव
परियोजना के अनुमानित निवेश लगभग 2,500 करोड़ रुपये हैं, जिससे सीधे-सीधे 1,500 से अधिक कुशल नौकरियों का सृजन होगा। इसके अलावा, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को विकसित करने से छोटे और मध्यम उद्यमों को भी लाभ मिलेगा। तकनीकी रूप से, भारतीय वैज्ञानिकों को एंटी‑रडार इंटेग्रेशन, हाई‑स्पीड डेटा प्रोसेसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता‑आधारित लक्ष्य पहचान में प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे भविष्य में स्वदेशी एंटी‑एयर सिस्टम के विकास की नींव मजबूत होगी।
भविष्य की संभावनाएँ
यह सहयोग न केवल भारत की सीमाओं की सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भी परिवर्तन लाएगा। दक्षिण‑एशिया में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र, भारत के पास अब एक विश्व‑स्तरीय शॉर्ट‑रेंज एंटी‑मिसाइल क्षमता होगी, जो संभावित दुश्मन के रॉकेट हमलों को प्रभावी रूप से निरस्त कर सकेगी। साथ ही, इस पहल से भारत‑इज़राइल रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊँचाई मिलेगी, जिससे दोनों देशों के बीच तकनीकी हस्तांतरण और अनुसंधान सहयोग को और गहरा किया जा सकेगा।