केंद्रीय सूचना आयोग ने आईआईटी मद्रास को 2023‑24 वित्तीय वर्ष की ग्रांट‑इन‑एड निधियों के प्रोजेक्ट‑वार उपयोग का विवरण देने के लिए बाध्य किया। यह आदेश अनन्या दुबे द्वारा दायर आरटीआई याचिका के बाद जारी किया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- IIT‑Madras को 2023‑24 के ग्रांट‑इन‑एड निधियों का प्रोजेक्ट‑वार विवरण देना अनिवार्य
- CPIO ने सूचना को अत्यधिक विस्तृत बताकर प्रारम्भ में अनुरोध को अस्वीकार किया
- सूचना आयुक्त ने पुनः समीक्षा की और संशोधित उत्तर देने का निर्देश दिया
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान‑मद्रास (IIT‑Madras) को 2023‑24 वित्तीय वर्ष में प्राप्त ग्रांट‑इन‑एड निधियों के उपयोग का विस्तृत, प्रोजेक्ट‑वार विवरण प्रदान करने का आदेश दिया है। यह आदेश अनन्या दुबे द्वारा दायर सूचना के अधिकार (RTI) याचिका के परिणामस्वरूप आया है, जिसमें उन्होंने पिछले तीन वित्तीय वर्षों की निधियों के उपयोग, उपयोग प्रमाणपत्रों की प्रतिलिपि और सहयोगी संस्थानों के नामों की मांग की थी।
पृष्ठभूमि और प्रारम्भिक अस्वीकृति
प्रारम्भ में केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (CPIO) ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, यह तर्क देते हुए कि तीन वर्षों की जानकारी अत्यधिक बड़ी है और उसे इकट्ठा करने में संस्थान के संसाधनों की अत्यधिक बर्बादी होगी। इस कारण से याचिकाकर्ता को अपनी माँग को संकीर्ण करने का निर्देश दिया गया, और अंततः उन्होंने केवल वित्तीय वर्ष 2023‑24 के डेटा को ही मांगा।
वित्तीय आँकड़े और सीमाएँ
CPIO ने बताया कि उक्त अवधि में IIT‑Madras को प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं के लिए ₹537 करोड़ और उद्योग‑अनुसंधान के लिए ₹241 करोड़ की सहायता मिली थी। उन्होंने कहा कि ये निधियाँ प्रायोजक एजेंसियों के आदेश या समझौतों के अनुसार उपयोग की गईं। हालांकि, उपयोग प्रमाणपत्रों की प्रतिलिपि बिना प्रायोजक की सहमति के जारी नहीं की जा सकती, और सहयोगी संस्थानों की सूची तुरंत उपलब्ध नहीं थी।
आयोग की प्रतिक्रिया और नया आदेश
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलांगी ने यह नोट किया कि ग्रांट‑इन‑एड निधियों के उपयोग संबंधी जानकारी का पर्याप्त उत्तर नहीं दिया गया था। उन्होंने CPIO को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को एक संशोधित, स्पष्ट उत्तर प्रदान करे, जिसमें विशेष रूप से 2023‑24 के निधियों के उपयोग का विस्तृत विवरण शामिल हो। यह कदम पारदर्शिता को बढ़ावा देने और सार्वजनिक संस्थानों को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
भविष्य की संभावनाएँ
इस आदेश के बाद IIT‑Madras को अपने सभी सक्रिय परियोजनाओं, उपयोग प्रमाणपत्रों और सहयोगी समझौतों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी। यह न केवल संस्थान की जवाबदेही को सुदृढ़ करेगा, बल्कि अन्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के लिए भी एक मानक स्थापित करेगा, जिससे भविष्य में अधिक पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन की उम्मीद की जा सकती है।