सुरक्षा विशेषज्ञों ने UMANG पोर्टल में कई गंभीर कमजोरियों की पहचान की, जिससे EPFO के यूएएन, LPG सिलेंडर बुकिंग और कई सेवाओं में आधार नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक हो रही है। सरकार ने तत्काल सुधार का वादा किया, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पैच अपूर्ण है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- UMANG पोर्टल में मौजूदा कमजोरियों ने EPFO, LPG और आधार डेटा को उजागर किया
- डेटा प्लेनटेक्स्ट में संग्रहीत था, जो 2016 के आधार अधिनियम के विरुद्ध है
- सरकारी सुधार अस्थायी दिखते हैं और संभावित साइबर‑क्राइम जोखिम बढ़ाते हैं
भारत में डिजिटल प्रशासन का प्रमुख स्तम्भ, UMANG (Unified Mobile Application for New‑age Governance), नौ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था। इस प्लेटफ़ॉर्म में केंद्र और राज्य सरकारों की 2,400 से अधिक सार्वजनिक सेवाएँ एकीकृत की गई हैं, जिससे नागरिकों को एक ही ऐप से कई कार्य करने की सुविधा मिलती है। हालांकि, इस व्यापक पहुँच के पीछे गंभीर सुरक्षा खामियां छिपी थीं, जिन्हें दो स्वतंत्र सुरक्षा शोधकर्ता, अक्षय सी.एस. और viral Vaghela, ने उजागर किया।
विकासात्मक खामियों का मूल कारण
शोधकर्ताओं ने बताया कि पोर्टल की आर्किटेक्चर स्वयं ही कई API को प्लेनटेक्स्ट में डेटा भेजने की अनुमति देती है। यह डिज़ाइन त्रुटि “डिज़ाइन द्वारा ही टूटे हुए” होने के समान है, जैसा कि Vaghela ने कहा। परिणामस्वरूप, उपयोगकर्ता का यूनिक अकाउंट नंबर (UAN) EPFO से, प्रमुख तेल कंपनियों से LPG सिलेंडर बुकिंग विवरण, और कई अन्य सेवाओं में आधार नंबर बिना एन्क्रिप्शन के उपलब्ध हो गया। यह न केवल 2016 के आधार अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि संभावित फ़िनटेक धोखाधड़ी के द्वार भी खोलता है।
EPFO मॉड्यूल की विशेष महत्वता
UMANG में EPFO मॉड्यूल सबसे अधिक उपयोग किया गया सेवा है, जिसने पिछले तीन महीनों में 40 करोड़ से अधिक लेन‑देन दर्ज किए। यह संख्या भारत के आधार‑सीडिंग एन्केबलर से 15 गुना अधिक है। यदि कोई हमलावर इन UAN नंबरों को प्राप्त कर ले, तो वह बैंक विवरण बदल कर या भुगतान शुरू करके बड़े पैमाने पर फंड निकाल सकता है। इस संभावना को सुरक्षा विशेषज्ञ Karan Saini ने “बहुत चिंताजनक” कहा।
सरकारी प्रतिक्रिया और अस्थायी समाधान
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने The Hindu को बयान जारी करते हुए कहा कि उन्होंने “विवरणों की सावधानीपूर्वक जाँच की है और आवश्यक सुधारात्मक एवं रोकथाम उपाय लागू किए हैं”। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित API में प्लेनटेक्स्ट डेटा को “उचित रूप से एन्क्रिप्ट” किया गया है। लेकिन अक्षय ने बताया कि एन्क्रिप्शन “खराब और अपर्याप्त” है, और एक सरल कार्य‑विधि से इसे तोड़ा जा सकता है।
भविष्य में जोखिम और समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पोर्टल स्तर पर पैच लागू करना पर्याप्त नहीं है; प्रत्येक सेवा‑प्रदाता को भी समान सुरक्षा मानकों को अपनाना होगा। इसके अलावा, भारत को एआई‑आधारित कोड ऑडिटिंग जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि मौजूदा “वार रूम” पहल में स्थानीय ओपन‑सोर्स मॉडल का प्रयोग किया जा रहा है। यह कदम लंबी अवधि में सरकारी कोड‑बेस की गहरी कमजोरियों को दूर करने में मदद कर सकता है।
अंत में, इस घटना ने डिजिटल सरकारी सेवाओं के सुरक्षा ढांचे की पुनः समीक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है, जिससे नागरिकों का भरोसा पुनः स्थापित हो सके।