प्रधानमंत्री मोदी ने इंफोसिस सह‑संस्थापक नंदन निलेकणी को परीक्षा सुधार हेतु हाई‑पावर टास्क‑फ़ोर्स का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया है। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा बनाने वाले इस नेता का नया लक्ष्य तकनीकी‑संचालित, लीकेज‑मुक्त परीक्षा प्रणाली बनाना है।

Key Takeaways

  • नंदन निलेकणी को परीक्षा सुधार टास्क‑फ़ोर्स का प्रमुख नियुक्त किया गया
  • उनकी पहचान आधार (Aadhaar) परियोजना के मुख्य आर्किटेक्ट के रूप में है
  • नई प्रणाली में तकनीकी‑आधारित सुरक्षा और पारदर्शिता पर ज़ोर

नंदन निलेकणी, इंफोसिस के सह‑संस्थापक और भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के प्रमुख वास्तुकार, अब परीक्षा सुधार में नया अध्याय लिख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक हाई‑पावर टास्क‑फ़ोर्स का नेतृत्व करने के लिए चुना है, जिसका उद्देश्य तकनीकी‑संचालित, लीकेज‑मुक्त परीक्षा प्रणाली बनाना है।

निलेकणी ने 2009 में आधार (UIDAI) की नींव रखी, जिससे भारत में 1.3 अरब से अधिक नागरिकों को डिजिटल पहचान मिली। इस परियोजना ने डेटा सुरक्षा, स्केलेबिलिटी और सार्वजनिक‑से‑सरकार (G2C) सेवाओं में क्रांति लाई। अब वही दृष्टिकोण परीक्षा बोर्डों में लाया जाएगा, जहाँ कागज़ी पेपर लीक और प्रश्नपत्र चोरी के मामलों में भारी चिंता बनी हुई है।

टास्क‑फ़ोर्स में शिक्षा विशेषज्ञ, आईटी पेशेवर और नियामक संस्थाएँ शामिल होंगी। उनका लक्ष्य एआई‑आधारित मॉनिटरिंग, ब्लॉकचेन‑सुरक्षित प्रश्नपत्र प्रबंधन और ऑनलाइन परीक्षा प्लेटफ़ॉर्म को सुदृढ़ करना है। यह पहल न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि छात्रों के भरोसे को भी पुनर्स्थापित करेगी।

Historical Background

2009‑2015 के दौरान, निलेकणी ने आधार को विश्व‑स्तर की पहचान प्रणाली में बदल दिया, जिससे भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी स्थान मिला। उनके नेतृत्व में UIDAI ने डेटा प्राइवेसी, बायोमेट्रिक एन्क्रिप्शन और सर्विस‑ऑरिएंटेड आर्किटेक्चर को मानक बनाया। यह अनुभव उन्हें जटिल, राष्ट्रीय‑स्तर की परियोजनाओं को सफलतापूर्ण रूप से प्रबंधित करने योग्य बनाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that a technology‑driven exam system can reduce paper‑leak incidents by up to 70% and restore public confidence in competitive examinations, which are critical gateways to higher education and government jobs.

"निलेकणी का डिजिटल‑इकोसिस्टम अनुभव परीक्षा सुधार में आवश्यक सुरक्षा और स्केलेबिलिटी प्रदान करेगा," कहा शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. रीतिका शर्मा ने।
Did You Know?: आधार ने 2015 में विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली का रिकॉर्ड बनाया, जो आज भी बढ़ती जा रही है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: टास्क‑फ़ोर्स कब शुरू होगा और इसका प्रारम्भिक लक्ष्य क्या है?
उत्तर: टास्क‑फ़ोर्स ने जुलाई 2026 में काम शुरू किया है, और पहला लक्ष्य अगले दो वर्षों में प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाओं में डिजिटल सुरक्षा का पायलट लागू करना है।

प्रश्न 2: इस नई प्रणाली से छात्रों को क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: छात्रों को अधिक पारदर्शी, समय‑बद्ध और लीकेज‑रहित परीक्षा प्रक्रिया मिलेगी, जिससे उनके परिणामों में निष्पक्षता बढ़ेगी।