1951 के शरणार्थी कन्वेंशन के 75 वर्ष पूरे होने पर, छह शरणार्थियों ने अपने संघर्ष की कहानियाँ साझा कीं। यह संधि युद्ध और हिंसा से भाग रहे लोगों को सुरक्षा और अधिकार प्रदान करने का आधार रही है।
मुख्य बातें
- 1951 के शरणार्थी कन्वेंशन ने युद्ध और उत्पीड़न से भाग रहे लोगों के लिए वैश्विक मानक स्थापित किए।
- दुनिया भर में वर्तमान में 4.1 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हैं।
- 'नॉन-रिफाउलमेंट' (Non-refoulement) सिद्धांत शरणार्थियों को वापस खतरे में भेजने से रोकता है।
- बदलती वैश्विक राजनीति और सख्त सीमा नीतियों के कारण इस संधि पर दबाव बढ़ रहा है।
आज 28 जुलाई, 2026 को 1951 शरणार्थी कन्वेंशन की 75वीं वर्षगांठ है। द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद तैयार की गई यह संधि उन लोगों की रक्षा के लिए बनाई गई थी जो युद्ध, हिंसा और उत्पीड़न के कारण अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए। समर्थकों का कहना है कि इस संधि ने पिछले सात दशकों में लाखों लोगों की जान बचाई है।
इस संधि का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत 'नॉन-रिफाउलमेंट' (Non-refoulement) है। यह सिद्धांत किसी भी देश को किसी शरणार्थी को ऐसे स्थान पर वापस भेजने से रोकता है जहाँ उनके जीवन, स्वतंत्रता या सुरक्षा को गंभीर खतरा हो। हालांकि, वर्तमान में वैश्विक स्तर पर इस संधि का सम्मान कम होता दिख रहा है। अमेरिका जैसी महाशक्तियों की बदलती नीतियों ने शरण चाहने वालों के लिए रास्ते कठिन कर दिए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह संधि?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के दौर में यह संधि और भी महत्वपूर्ण हो गई है। दुनिया भर में 130 से अधिक सशस्त्र संघर्ष चल रहे हैं, जिससे विस्थापितों की संख्या बढ़ने की आशंका है। वर्तमान में लगभग 4.1 करोड़ शरणार्थी जबरन विस्थापित हैं, जिनमें से 70% कम और मध्यम आय वाले देशों में रह रहे हैं।
शरणार्थी कन्वेंशन ने एक सरल लेकिन शक्तिशाली सिद्धांत को संहिताबद्ध किया है: उत्पीड़न से भागने वाले लोगों को सुरक्षा और संरक्षण पाने का अधिकार है।
विभिन्न संघर्षों से आए शरणार्थियों की कहानियाँ इस संधि की प्रासंगिकता को दर्शाती हैं। म्यांमार से भागकर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में शरण लिए हुए सय्यद आलम जैसे लोग आज भी अनिश्चितता के साये में जी रहे हैं। वहीं, निकारागुआ से भागकर स्पेन में बसे मानवाधिकार वकील जुआन कार्लोस आर्से बताते हैं कि इस कन्वेंशन की वजह से ही उन्हें सुरक्षा का अहसास मिला।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1951 का कन्वेंशन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में पैदा हुए विस्थापितों की समस्याओं को हल करने के लिए बनाया गया था। मूल रूप से यह केवल यूरोपीय शरणार्थियों पर केंद्रित था, लेकिन बाद में इसे वैश्विक स्तर पर विस्तारित किया गया ताकि दुनिया के किसी भी कोने में होने वाले संघर्षों को कवर किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 'नॉन-रिफाउलमेंट' क्या है?
यह एक अंतरराष्ट्रीय कानून है जो किसी भी देश को शरणार्थियों को ऐसे देश में वापस भेजने से रोकता है जहाँ उन्हें उत्पीड़न या हिंसा का सामना करना पड़ सकता है।
2. वर्तमान में कितने लोग विस्थापित हैं?
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 4.1 करोड़ से अधिक लोग जबरन विस्थापित हैं।