गुजरात उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद, सूरत नगर निगम ने नासिरनगर में हुई तोड़फोड़ के बाद विस्थापित हुए परिवारों को घर आवंटित करने के लिए एक तीन सदस्यीय निगरानी टीम नियुक्त की है।
मुख्य बातें
- गुजरात हाई कोर्ट के आदेश के बाद SMC ने बनाई विशेष टीम।
- नासीरनगर में 106 इकाइयों को तोड़ा गया था।
- विस्थापितों को जहांगीरपुरा EWS कॉलोनी में बसाने की योजना।
- निगरानी टीम में दो डिप्टी कमिश्नर और एक अतिरिक्त नगर अभियंता शामिल।
सूरत नगर निगम (SMC) ने गुजरात उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए, नासिरनगर क्षेत्र में हुई विवादित तोड़फोड़ के बाद विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया तेज कर दी है। नगर आयुक्त एम. नागराजन ने मंगलवार को एक तीन सदस्यीय निगरानी टीम की घोषणा की, जिसका मुख्य कार्य प्रभावित परिवारों को नए आवास आवंटित करना होगा।
इस निगरानी टीम में डिप्टी कमिश्नर निधि शिवाच, स्वाति देसाई और अतिरिक्त नगर अभियंता एम. ए. चावड़ा शामिल हैं। चावड़ा, जो किफायती आवास विभाग का भी प्रभार संभाल रहे हैं, ने बताया कि टीम सबसे पहले याचिकाकर्ताओं से संपर्क करेगी और उनसे निवास संबंधी दस्तावेज जैसे प्रॉपर्टी टैक्स बिल और बिजली बिल मांगेगी। पात्रता के लिए यह अनिवार्य होगा कि परिवार कम से कम एक वर्ष से नासिरनगर में रह रहा हो और उनके पास शहर में कोई अन्य घर न हो।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल आवास का नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। नासिरनगर में 30 मई को कथित तौर पर सार्वजनिक सड़क के सीमांकन के नाम पर 106 घरों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस कार्रवाई ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, क्योंकि निवासियों का दावा है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के बेघर कर दिया गया।
यह कदम प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते विश्वास की कमी को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप का परिणाम है।
SMC की योजना प्रभावित परिवारों को जहांगीरपुरा EWS कॉलोनी में स्थानांतरित करने की है, जहां लगभग 130 खाली इकाइयां उपलब्ध हैं। हालांकि, कांग्रेस पार्षद अरशद जरीवाला ने इस योजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवार बहुमंजिला घरों में रहते थे, और एक छोटे 1BHK फ्लैट में इतने बड़े परिवारों का समायोजन करना चुनौतीपूर्ण होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नासिरनगर की यह घटना सूरत के शहरी विकास और अतिक्रमण विरोधी अभियानों के बीच एक संवेदनशील मोड़ है। 30 मई की कार्रवाई के बाद, 26 प्रभावित निवासियों ने न्याय और मुआवजे के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद न्यायालय ने प्रशासन को सख्त रुख अपनाने का निर्देश दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विस्थापितों को घर पाने के लिए क्या दस्तावेज चाहिए?
उन्हें संपत्ति कर बिल, बिजली बिल और नासिरनगर में रहने का प्रमाण देना होगा।
2. पुनर्वास के लिए कौन सी जगह चुनी गई है?
प्रशासन ने जहांगीरपुरा EWS कॉलोनी को पुनर्वास के लिए चुना है।