उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने SRMIST के 22वें दीक्षांत समारोह में कहा कि अनुसंधान की सार्थकता समाज के कल्याण में निहित है। उन्होंने भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी और वैज्ञानिक विरासत का भी उल्लेख किया।

मुख्य बातें

  • उपराष्ट्रपति ने कहा कि अनुसंधान का लक्ष्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज सेवा होना चाहिए।
  • भारत द्वारा 100 से अधिक देशों को मुफ्त कोविड वैक्सीन भेजने की सराहना की गई।
  • SRMIST के 22वें दीक्षांत समारोह में हजारों छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं।
  • तमिलनाडु के राज्यपाल ने प्राचीन भारतीय विज्ञान पर गर्व करने का आह्वान किया।

चेन्नई के कट्टंकुलाथुर में आयोजित SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SRMIST) के 22वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने छात्रों को संबोधित करते हुए एक प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुसंधान (Research) का सर्वोच्च उद्देश्य तब सिद्ध होता है जब वह समाज के काम आता है।

अपने संबोधन के दौरान, उपराष्ट्रपति ने भारत की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, "हम कभी भी अपने अनुसंधान का केवल आर्थिक लाभ नहीं उठाना चाहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर, भारत ने 100 से अधिक देशों को मुफ्त में कोविड वैक्सीन भेजी। यही भारत की महानता है।" उन्होंने केन्याई संसद के अध्यक्ष के साथ अपनी हालिया मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे भारत की वैक्सीन ने पूरी मानवता को बचाने में मदद की है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, उपराष्ट्रपति का यह बयान अकादमिक जगत और नीति निर्माताओं के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बनाता है। यह अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे सामाजिक समाधानों और सतत विकास (Sustainable Development) से जोड़ने पर बल देता है।

"अनुसंधान का वास्तविक मूल्य प्रयोगशाला के परिणामों में नहीं, बल्कि समाज में होने वाले सकारात्मक बदलाव में है।"

इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी प्राचीन वैज्ञानिक विरासत पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ते हुए हमें अपने पूर्वजों के ज्ञान को नहीं भूलना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी में इतिहास अत्यंत प्राचीन है। आयुर्वेद से लेकर खगोल विज्ञान तक, भारत ने सदियों से दुनिया का मार्गदर्शन किया है। वर्तमान में, भारत 'विश्व गुरु' बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है, विशेषकर स्वास्थ्य सेवा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में।

क्या आप जानते हैं?: भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' पहल के तहत दुनिया के कई विकासशील देशों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. SRMIST का 22वां दीक्षांत समारोह कहाँ आयोजित किया गया?

यह समारोह तमिलनाडु के कट्टंकुलाथुर में आयोजित किया गया था।

2. उपराष्ट्रपति ने किस बात पर विशेष जोर दिया?

उन्होंने अनुसंधान को समाज की सेवा और व्यावहारिक समाधानों से जोड़ने पर जोर दिया।