उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की है।

मुख्य बातें

  • NEET पेपर लीक और परीक्षा धांधली के खिलाफ पूरे यूपी में आक्रोश।
  • लखनऊ और प्रयागराज में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प।
  • छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
  • UPSSSC PET कट-ऑफ में सुधार और पारदर्शिता की मांग।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को NEET पेपर लीक मामले और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और आजमगढ़ जैसे शहरों में प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जहाँ छात्रों का पुलिस के साथ आमना-सामना हुआ।

लखनऊ और प्रयागराज में तनावपूर्ण स्थिति

राजधानी लखनऊ में, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया और राज्यपाल निवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप झड़प हुई और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। भीम आर्मी के कार्यकर्ता विकास गौतम ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार छात्रों के हितों के खिलाफ काम कर रही है।

वहीं, प्रयागराज में 'संयुक्त छात्र मंच' के बैनर तले छात्रों ने मार्च निकाला। छात्रों का आरोप है कि परीक्षाओं में धोखाधड़ी का एक समानांतर नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी कीमत देश का भविष्य चुका रहा है। प्रयागराज के एक अभ्यर्थी श्याम प्रसाद ने खुलासा किया कि पेपर लीक माफियाओं का यह अवैध कारोबार ₹50,000 करोड़ से अधिक का है, जो मेधावी छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर रहा है।

BozokMedia विश्लेषण: क्यों यह मुद्दा गंभीर है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं है, बल्कि देश की संपूर्ण शिक्षा और रोजगार प्रणाली पर गहरा संकट है। जब पेपर लीक जैसी घटनाएं बार-बार होती हैं, तो यह न केवल छात्रों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी खत्म कर देती हैं।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और पेपर लीक माफियाओं का बढ़ता प्रभाव देश की अगली पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

छात्रों ने UPSSSC PET के कट-ऑफ में सुधार की भी मांग की है, ताकि 'न्यूनतम कट-ऑफ, अधिकतम अवसर' के सिद्धांत को लागू किया जा सके और लगभग एक लाख अधिक छात्रों को मुख्य परीक्षा में बैठने का मौका मिल सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में पिछले कुछ वर्षों में NEET और विभिन्न राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं में तेजी आई है। इससे पहले भी कई राज्यों में छात्रों ने बड़े पैमाने पर आंदोलन किए हैं, जिससे सरकार को परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

क्या आप जानते हैं?: पेपर लीक के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान और छात्रों के मानसिक तनाव का आकलन करना कठिन है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह करोड़ों की अवैध अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. छात्र मुख्य रूप से क्या मांग कर रहे हैं?
छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रक्रियाओं में पूर्ण सुधार की मांग कर रहे हैं।

2. प्रदर्शन किन शहरों में हुए?
प्रमुख प्रदर्शन लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और आजमगढ़ में देखे गए।