होसुर के एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्र में नसबंदी के दौरान हुई गंभीर लापरवाही के कारण एक मादा कुत्ते का पेट फट गया और उसकी आंतें बाहर निकल आईं। स्थानीय बचावकर्ता ने कुत्ते को समय पर बचा लिया, लेकिन केंद्र के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुख्य बातें

  • होसुर नगर निगम के ABC केंद्र में नसबंदी के बाद एक मादा कुत्ते की गंभीर स्थिति में बरामदगी।
  • सर्जरी में टांकों की कमी के कारण कुत्ते का पेट फट गया और आंतें बाहर निकल आईं।
  • ABC केंद्र के प्रभारी डॉक्टर पर सबूत मिटाने और मामले को दबाने का आरोप।
  • एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने मामले की जांच के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित किया है।

होसुर, तमिलनाडु: होसुर नगर निगम द्वारा संचालित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नसबंदी (sterilisation) के लिए ले जाए गए एक मादा कुत्ते को जब पांच दिनों के अनिवार्य रिकवरी पीरियड के बाद वापस छोड़ा गया, तो उसका पेट बुरी तरह फट चुका था। स्थानीय डॉग रेस्क्यूअर अजय ने शुक्रवार को इस कुत्ते को बदहाल स्थिति में पाया और तुरंत सरकारी पॉलीक्लिनिक पहुँचाया।

रेस्क्यूअर अजय के अनुसार, कुत्ते के सर्जिकल घाव से खून और आंतें बाहर निकल रही थीं। कुत्ते की स्थिति इतनी गंभीर थी कि वह खुद अपनी ही आंतों को काटने की कोशिश कर रहा था। जांच में यह पाया गया कि सर्जरी के दौरान सुरक्षा के लिए आवश्यक तीन स्तरों के टांकों (मांसपेशी, सब-क्यूटेनियस और त्वचा) के बजाय, दो स्तरों के टांकों की भारी कमी थी।

BozokMedia विश्लेषण: सिस्टम की विफलता

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अप्रैल में इसी तरह का मामला सामने आया था। होसुर ABC केंद्र के प्रबंधन में निरंतर खामियां देखी जा रही हैं। वर्तमान में केंद्र का संचालन 'इंटरनेशनल ट्रस्ट ऑफ पीस' नामक एनजीओ कर रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में कुत्तों के लापता होने और बिना ऑडिट की गई मौतों की शिकायतों में भारी वृद्धि हुई है।

यदि समय पर एंटीबायोटिक्स और टांके नहीं लगाए जाते, तो पेरिटोनिटिस (peritonitis) जैसी घातक संक्रमण का खतरा रहता है।

इस मामले में और भी चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब ABC केंद्र के प्रभारी डॉ. कलाईमणि ने रेस्क्यूअर को फोटो डिलीट करने के लिए कहा। हालांकि, डॉ. कलाईमणि ने सर्जरी से इनकार किया है, लेकिन एनिमल वेलफेयर बोर्ड की सदस्य प्रभावती ने कहा है कि केंद्र के प्रभारी होने के नाते उनकी जिम्मेदारी घटना की सूचना देना था, जो उन्होंने नहीं किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

होसुर में ABC कार्यक्रम का संचालन पहले 'प्रानिमित्रन' नामक एनजीओ द्वारा किया जाता था, जिसका अनुबंध कोयंबटूर और तिरुपुर में शिकायतों के कारण रद्द कर दिया गया था। वर्तमान प्रबंधन पर भी नैतिकता और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: नसबंदी के बाद कुत्तों को कम से कम 5-7 दिनों तक गहन निगरानी की आवश्यकता होती है ताकि घाव भरने की प्रक्रिया सही ढंग से हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ABC कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए उनकी नसबंदी करने की एक सरकारी योजना है।

प्रश्न 2: इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है?
उत्तर: फिलहाल जांच जारी है, लेकिन ABC केंद्र के प्रभारी डॉक्टर और वर्तमान एनजीओ पर लापरवाही के आरोप लगे हैं।