कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की नई गाइडलाइन के अनुसार 17 साल की उम्र में कोलेस्ट्रॉल टेस्ट अनिवार्य और 35‑40 वर्ष में हार्ट CT स्कैन आवश्यक बताया गया है, जिससे युवा वयस्कों में दिल की बीमारी को रोका जा सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत में 30 से 40 वर्ष के बीच दिल के दौरे (हार्ट अटैक) की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं, और कई मामलों में युवा लोगों की मृत्यु भी हो रही है। इस प्रवृत्ति को देखते हुए कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया (CSI) ने नई निवारक जांच‑गाइडलाइन जारी की है, जिसे विश्व प्रसिद्ध हृदय‑रोग विशेषज्ञ डॉ. देवी शेट्टी ने सार्वजनिक किया।

पृष्ठभूमि और आँकड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल लगभग 2.8 मिलियन नई हृदय‑रोग मामलों की रिपोर्ट होती है, और उनमें से 20 % से अधिक रोगी 40 वर्ष से कम आयु के हैं। असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान और आनुवांशिक प्रवृत्ति इन रोगों के मुख्य कारण माने जाते हैं।

नई CSI गाइडलाइन: 17 साल में पहला ब्लड टेस्ट

गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक भारतीय को 17 वर्ष की आयु में कम से कम एक बार लिपिड प्रोफ़ाइल टेस्ट कराना अनिवार्य है। यह परीक्षण रक्त में कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और LDL‑HDL स्तरों को मापता है, जिससे युवा उम्र में ही असामान्य वृद्धि का पता चल जाता है। प्रारंभिक पहचान से जीवन‑शैली में सुधार (संतुलित आहार, नियमित व्यायाम) करके रोग की प्रगति को रोका जा सकता है।

35‑40 वर्ष में नियमित हार्ट चेक‑अप और CT स्कैन

35 से 40 वर्ष के बीच सभी पुरुषों (और जोखिम‑ग्रस्त महिलाओं) को वार्षिक हृदय‑जाँच में हार्ट CT स्कैन शामिल करना चाहिए। यह गैर‑आक्रामक इमेजिंग तकनीक कोरोनरी धमनियों में कैल्शियम जमा, प्लाक और अन्य संरचनात्मक असामान्यताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यदि स्कैन के परिणाम सामान्य आते हैं, तो अगले 7‑10 वर्षों तक गंभीर चिंता नहीं होती, परन्तु फिर भी स्वस्थ आहार व व्यायाम बनाए रखना आवश्यक है।

परिवारिक इतिहास और उच्च‑जोखिम समूह

डॉ. शेट्टी ने कहा कि जिनके परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास है, उन्हें 30 वर्ष की आयु का इंतजार नहीं करना चाहिए; 30 या उससे पहले ही विस्तृत हृदय‑जाँच (इकोकार्डियोग्राफी, स्ट्रेस टेस्ट) करानी चाहिए। इसी तरह, मैराथन, हाई‑इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग या अन्य एथलेटिक गतिविधियों में सक्रिय युवा खिलाड़ियों को भी प्रारम्भिक स्क्रीनिंग से लाभ मिलेगा।

जीवन‑शैली एवं निरंतर निगरानी

रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के नियमित माप को दैनिक स्वास्थ्य‑रूटीन का हिस्सा बनाना चाहिए। यदि किसी पैरामीटर में असामान्य वृद्धि पाई जाए तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक दवा‑उपचार शुरू करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि एक घंटे से कम समय में पूरी हृदय‑जाँच पूरी की जा सकती है, जिससे वार्षिक स्क्रीनिंग को व्यावहारिक बनाना आसान हो जाता है।

समापन

डॉ. देवी शेट्टी की यह पहल भारत में हृदय‑रोग रोकथाम के परिदृश्य को बदल सकती है। समय पर जांच, सही जीवन‑शैली और गाइडलाइन का पालन करके लाखों युवा जीवन बचाए जा सकते हैं।