डायटिशियन श्वेता जे. पंचाल ने ग्लाइसेमिक प्रभाव, पोषण मूल्य और क्लिनिकल अनुभव के आधार पर कई लोकप्रिय मिठासों को 1‑10 के स्केल पर रैंक किया। मोन्क फ्रूट को शीर्ष पर रखा गया, जबकि ब्राउन शुगर, कोकोनट शुगर और कृत्रिम स्वीटनर को सबसे खराब माना गया।
नई दिल्ली, 9 जुलाई 2026 – पोषण विशेषज्ञ श्वेता जे. पंचाल ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में विभिन्न मिठासों को 1 से 10 तक के पैमाने पर रैंक किया, जिससे भारत में मीठे पदार्थों के बारे में चल रहे मिथकों को चुनौती मिली। उनका मूल्यांकन तीन मुख्य मानदंडों पर आधारित था: ग्लाइसेमिक प्रभाव, पोषण संबंधी लाभ और व्यक्तिगत क्लिनिकल अनुभव। इस रैंकिंग ने यह स्पष्ट किया कि कई “स्वस्थ” विकल्प वास्तव में शुगर के बराबर या उससे भी ख़तरनाक हो सकते हैं।
शीर्ष पर मोन्क फ्रूट और शहद
पंचाल ने मोन्क फ्रूट को 8‑9/10 अंक दिए, विशेषकर उन लोगों के लिए जो मधुमेह या इंसुलिन स्पाइक से बचना चाहते हैं। मोन्क फ्रूट में मौजूद मोग्रोसाइड्स एंटीऑक्सिडेंट गुण रखते हैं और रक्त शर्करा स्तर पर कोई प्रभाव नहीं डालते। इसके बाद डेट्स को 7‑8/10 अंक मिले, क्योंकि इनमें फाइबर की मात्रा अधिक है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम है। शहद को 7/10 अंक मिले, मुख्यतः इसके एंटी‑माइक्रोबियल और संभावित आंत स्वास्थ्य लाभों के कारण।
मध्यम रैंकिंग: जगर, स्टेविया और कच्ची शुगर
जगर (गुड़) और स्टेविया दोनों को 5/10 अंक मिले। जगर में कुछ खनिज होते हैं, पर पंचाल ने कहा, “अंततः यह भी शुगर ही है।” स्टेविया, जबकि प्राकृतिक स्रोत है, उसके ग्लाइसेमिक प्रभाव कम होने के बावजूद पोषण मूल्य सीमित है। सफेद शुगर, ब्राउन शुगर और कोकोनट शुगर को सभी को 3/10 अंक मिले, क्योंकि शरीर इनको लगभग समान रूप से प्रोसेस करता है, चाहे उनका रंग या मार्केटिंग अलग हो।
कृत्रिम मिठासों पर कठोर चेतावनी
कृत्रिम स्वीटनर को पंचाल ने न्यूनतम स्कोर दिया और उपयोग से पूरी तरह बचने की सलाह दी। उन्होंने उल्लेख किया कि एस्पार्टेम, सुक्रालोज़ और सैकरिन जैसे पदार्थों की सुरक्षा पर विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के मानदंड मौजूद हैं, पर हालिया अध्ययनों में आंत माइक्रोबायोम, दीर्घकालिक मेटाबॉलिज़्म और शुगर cravings पर संभावित नकारात्मक प्रभावों की ओर इशारा किया गया है।
विशेषज्ञों की राय: स्कोरिंग की सीमाएँ
कनिका मल्होत्रा, कंसल्टेंट डायटिशियन और डायबिटीज़ एजुकेटर, ने बताया कि “एक ही स्केल पर सभी मिठासों को रैंक करना शुरुआती बिंदु तो है, पर यह पुस्तक के कवर से कहानी नापने जैसा है।” वे ग्लाइसेमिक लोड, व्यक्तिगत मेटाबॉलिज़्म, आंत स्वास्थ्य और कुल आहार संतुलन को भी ध्यान में रखने की सलाह देती हैं। उनका कहना है, “एक छोटा जगर फाइबर‑रिच आहार में अलग प्रभाव डालता है बनिस्बत उसी मात्रा के प्रोसेस्ड फूड में।”
भविष्य की दिशा और उपभोक्ता सलाह
वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, स्टेविया और मोन्क फ्रूट सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं, विशेषकर मधुमेह रोगियों के लिए। परंतु दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार के लिए मिठास की आवश्यकता को धीरे‑धीरे कम करना अधिक प्रभावी है, न कि केवल एक विकल्प से दूसरे में बदलना। पंचाल और मल्होत्रा दोनों ने उपभोक्ताओं को “साखर‑मुक्त” उत्पादों के लेबल पढ़ने, घटकों की सूची पर ध्यान देने और व्यक्तिगत पोषण प्रोफ़ाइल के अनुसार चयन करने का आग्रह किया।