कोरिया जिले में 17 साल की छात्रा को किराने की दुकान के मालिक ने चोरी का झूठा आरोप लगा कर उसका स्कूटर ज़ब्त कर लिया, जिससे वह आत्महत्या कर गई। पुलिस ने तीन मालिकों पर विभिन्न अपराधों के तहत मामला दर्ज कर मार्ट को सील कर दिया।
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में 17 वर्षीय कक्षा 11 की छात्रा का दुखद अंत हुआ, जब उसने अपने घर के रसोई में लटकते हुए अपने जीवन को समाप्त कर दिया। घटना की जड़ में एक स्थानीय किराने की दुकान, आईसी मार्ट, के मालिक द्वारा लगाए गए चोरी के झूठे आरोप और स्कूटर जब्ती की कहानी है। पुलिस ने इस मामले में तीन मालिकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत कई आरोपों को दर्ज किया।
घटना की रूपरेखा
7 जुलाई को लड़की अपने छोटे भाई-बहन के साथ सनी चौक स्थित आईसी मार्ट गई थी, जहाँ वह घरेलू सामान खरीदना चाह रही थी। दुकान के मालिक ने उन्हें सौंदर्य प्रसाधन चुराने का झूठा आरोप लगाया और दोनों बहनों को एक लिखित बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। इसके साथ ही, उनके द्वारा लाई गई स्कूटर को जब्त कर लिया गया और बताया गया कि स्कूटर तभी वापस मिलेगा जब 50,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
परिवार और पुलिस की प्रतिक्रिया
विधवा पुलिस अधिकारी ने इस बात की सूचना मिलने पर तुरंत मार्ट के मालिक से स्कूटर लौटाने का अनुरोध किया, पर मालिक ने कहा कि स्कूटर कहीं और भेज दिया गया है और अगले दिन ही लेकर आएँगे। लड़की ने इस दबाव को अपने पिता, पब्लिक सर्विस में काम करने वाले कांस्टेबल शिवनाथ सिंह पैकर को नहीं बताया; बल्कि वह एक सहायक उप निरीक्षक को बता दिया, जो बाद में मामले को आगे बढ़ाने में मददगार रहा।
क़ानूनी कार्रवाई और सामाजिक प्रतिक्रिया
कोरिया के पुलिस प्रमुख ने बताया कि लड़की को झूठे आरोपों और स्कूटर के पैसे की माँग से मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा, जिससे वह डिप्रेशन में चली गई। पुलिस ने तीन मालिकों – दीपक वैद, विनोद वैद और जगत वैद – के खिलाफ आत्महत्या के उत्प्रेरक, जब्ती, और अन्य गंभीर अपराधों के तहत केस दर्ज किया। साथ ही, सुपरमार्केट को सील कर दिया गया और साइबर फॉरेंसिक टीम ने सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी।
प्रदर्शन और भविष्य की दिशा
इस मामले के बाद पुलिस कर्मियों के रिश्तेदारों ने बायकुंठपुर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया और लगभग आधे घंटे तक सड़क अवरुद्ध कर तत्काल गिरफ्तारियों की माँग की। वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर प्रदर्शन को समाप्त किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के झूठे आरोप न केवल व्यक्तिगत जीवन को बर्बाद करते हैं, बल्कि सामाजिक विश्वास को भी क्षीण करते हैं। यह घटना छोटे व्यापारियों में नैतिक जिम्मेदारी और उपभोक्ता अधिकारों के बारे में व्यापक चर्चा को प्रेरित करेगी।