विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) की 2026 की रिपोर्ट में बताया गया है कि हर साल 20.6 मिलियन नए कैंसर मामलों के साथ मृत्यु दर बढ़ रही है। कम आय वाले देशों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बहुत सीमित है, जिससे असमानता और बढ़ रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने 8 जुलाई 2026 को प्रकाशित Global Status Report on Cancer 2026 में बताया कि कैंसर अब वैश्विक स्तर पर मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण बन गया है, जहाँ हर साल लगभग 20.6 मिलियन नए मामलों की रिपोर्ट की गई है और 10 मिलियन से अधिक मौतें दर्ज हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो 2050 तक वार्षिक कैंसर मामलों की संख्या 35 मिलियन तक पहुंच सकती है।

मुख्य कारण और जोखिम कारक

रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 40% कैंसर मामलों को रोकने योग्य जोखिम कारकों से जोड़ा जा सकता है। इनमें मानव पापिलोमा वायरस (HPV), हेपेटाइटिस B और C, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी जैसे संक्रमण, शराब और तंबाकू का सेवन, अधिक शरीर वजन और शारीरिक निष्क्रियता शामिल हैं। इन कारणों को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में रोकथाम पर अधिक जोर देना आवश्यक है।

दवाओं की असमान उपलब्धता

दस प्रमुख प्राथमिक कैंसर दवाओं की उपलब्धता में अंतर स्पष्ट है: कम और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में यह 9% से 54% तक सीमित है, जबकि उच्च आय वाले देशों में 68% से 94% तक पहुंच है। यह अंतर न केवल इलाज की सफलता को प्रभावित करता है, बल्कि रोगियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 45% प्रभावित परिवार वित्तीय कठिनाइयों का सामना करते हैं और आधे से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हैं।

क्षेत्रीय असमानताएँ और भारत की स्थिति

एशिया 2024 में कुल कैंसर मामलों का 50.7% और मौतों का 56.5% हिस्सा रखता है, जो उसकी बड़ी जनसंख्या को दर्शाता है। यूरोप के पास केवल 9% जनसंख्या है, फिर भी वह 21% मामलों और 20% मौतों का स्रोत है। अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में मामलों की संख्या कम है, पर मृत्यु दर अधिक है, जो स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरी को उजागर करता है। भारत में कैंसर को अभी भी नोटिफायेबल बीमारी नहीं माना जाता, जिससे डेटा संग्रह में बाधाएँ आती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 15.6 लाख नए कैंसर मामले और 8.7 लाख मौतें होती हैं, जिससे यह रोग देश का दूसरा प्रमुख मृत्यु कारण बन गया है।

भविष्य की दिशा

रिपोर्ट ने कई सिफारिशें प्रस्तुत की हैं: कैंसर को नोटिफायेबल बनाना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में कैंसर देखभाल को शामिल करना, दवाओं की उपलब्धता बढ़ाना और रोकथाम‑आधारित कार्यक्रमों को सुदृढ़ करना। यदि इन कदमों को समय पर लागू किया जाए, तो अगले दशकों में रोग की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है।