राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की 39 नई दवाओं की खुदरा कीमतों को सीमित कर दिया है, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- NPPA ने DPCO, 2013 के तहत 39 नई दवा फॉर्मूलेशन की खुदरा कीमतों को सीमित किया।
- हार्ट अटैक और स्ट्रोक में इस्तेमाल होने वाला जीवन रक्षक इंजेक्शन टेनेक्टेप्लेस (Tenecteplase) सबसे महंगा है, जिसकी कीमत ₹60,238.27 प्रति वायल तय की गई है।
- इस मूल्य नियंत्रण के दायरे में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और संक्रमण की महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं।
भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 39 नई दवा फॉर्मूलेशन की खुदरा कीमतों को नियंत्रित कर दिया है। ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत जारी इस हालिया अधिसूचना का उद्देश्य आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक दवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाना है। यह आदेश मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, संक्रमण, आंखों के विकार और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर लागू होगा।
जीवन रक्षक इंजेक्शन टेनेक्टेप्लेस सबसे महंगा
इस अधिसूचना में शामिल दवाओं में सबसे महंगी दवा टेनेक्टेप्लेस (Tenecteplase - TNK-TPA) इंजेक्शन (50 मिलीग्राम) है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण जीवन रक्षक बायोटेक दवा है, जिसका उपयोग गंभीर दिल के दौरे (मायोकार्डियल इंफार्क्शन) और स्ट्रोक के दौरान रक्त के थक्कों (ब्लड क्लॉट्स) को घोलने के लिए आपातकालीन स्थिति में किया जाता है। एनपीपीए ने इसकी अधिकतम खुदरा कीमत ₹60,238.27 प्रति वायल तय की है। चूंकि यह एक जटिल जैव-प्रौद्योगिकी आधारित इंजेक्शन है, इसलिए इसकी कीमत सामान्य दवाओं की तुलना में काफी अधिक है, लेकिन मूल्य सीमा तय होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
मधुमेह और हृदय रोग की दवाओं पर विशेष ध्यान
भारत में मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, मूल्य नियंत्रण सूची में इस बीमारी से जुड़ी दवाओं को प्रमुखता दी गई है। इनमें ग्लिमेपिराइड, मेटफॉर्मिन, सिटाग्लिप्टिन, एम्पाग्लिफ्लोज़िन और डैपाग्लिफ्लोज़िन के विभिन्न संयोजनों (कॉम्बिनेशन) को शामिल किया गया है। इन दवाओं की खुदरा कीमतें अब फॉर्मूलेशन और क्षमता के आधार पर ₹8.85 से ₹19.30 प्रति टैबलेट के बीच सीमित कर दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाली टेल्मिसार्टन, एम्लोडिपिन और एटोरवास्टेटिन जैसी दवाओं के दामों को भी नियंत्रित किया गया है ताकि दिल के दौरे के जोखिम को कम किया जा सके।
नेत्र रोग और एंटीबायोटिक्स भी दायरे में शामिल
इस सूची में आंखों के संक्रमण और सर्जरी के बाद की सूजन को कम करने वाली आई-ड्रॉप्स जैसे नेपाफेनैक, मोक्सीफ्लोक्सासिन और लैटानोप्रोस्ट के संयोजनों को भी शामिल किया गया है। नेटारसुडिल और लैटानोप्रोस्ट ऑप्थैल्मिक सॉल्यूशन की कीमत ₹362.57 प्रति मिलीलीटर तय की गई है। इसके अलावा, संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स (जैसे अमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलैनेट) और बच्चों की पीडियाट्रिक ड्रॉप्स को भी इस मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया गया है।
दवा कंपनियों के लिए सख्त निर्देश
एनपीपीए के इस आदेश के तहत सन फार्मा, सिप्ला, मैनकाइंड फार्मा, एल्कैम और टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स जैसी प्रमुख दवा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। निर्माताओं को तत्काल प्रभाव से संशोधित मूल्य सूची (Form-V) जारी करनी होगी और सभी विवरणों को 'इंटीग्रेटेड फार्मास्युटिकल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम' (IPDMS) पर अपलोड करना होगा। किसी भी कंपनी को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की अनुमति नहीं होगी और उल्लंघन करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।