कोटा के डिगोड़ उपखंड में पोलाई खुर्द गांव के एक सड़क विक्रेता से गोलगप्पा खाने के बाद लगभग 115 लोगों को गंभीर लक्षण दिखे। इनमें से 12 को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया, जबकि शेष को आपातकालीन सेवाओं द्वारा रेफ़र किया गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पोलाई खुर्द में गोलगप्पा खाने के बाद 115 लोग बीमार हुए
  • 12 रोगियों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया
  • बच्चों सहित कई कमजोर वर्ग प्रभावित

कोटा जिले के डिगोड़ उपखंड के सिमलिया क्षेत्र में स्थित पोलाई खुर्द गांव में एक सड़क विक्रेता द्वारा बेचे जाने वाले गोलगप्पा (पानी‑पटासी) का सेवन करने के बाद लगभग 115 लोगों को उल्टी, दस्त और पेट में तीव्र दर्द जैसे गंभीर लक्षण दिखे। इस समूह में बड़ी संख्या में छोटे बच्चों को भी शामिल किया गया, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन को तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया देनी पड़ी।

अस्पताल में भर्ती और उपचार

रोगियों को तुरंत सिमलिया के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में ले जाया गया, जहाँ 12 गंभीर मामलों को भर्ती किया गया। शेष रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद निगरानी के लिए घर भेजा गया, जबकि कुछ को निकटवर्ती बड़े अस्पतालों में रेफ़र किया गया। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सभी प्रभावित व्यक्तियों को रिहाइड्रेशन थेरेपी और एंटीबायोटिक दवाओं से उपचारित किया।

सड़क भोजन सुरक्षा का ऐतिहासिक संदर्भ

राजस्थान में पिछले कई वर्षों में इसी तरह के खाद्य विषाक्तता के मामलों की रिपोर्टें आई हैं, विशेषकर गर्मियों के महीनों में जब असुरक्षित पानी और अपर्याप्त स्वच्छता की संभावना बढ़ जाती है। 2022 में भी कोटा के एक अन्य कस्बे में समान कारणों से कई बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया था, जिससे राज्य सरकार ने सडकों पर खाद्य विक्रेताओं के लिए नियमित निरीक्षण की घोषणा की थी।

प्राधिकरणों की प्रतिक्रिया और जांच

स्थानीय प्रशासन ने तुरंत एक आपातकालीन समिति का गठन किया है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और पुलिस शामिल हैं। जांच में गोलगप्पा के पानी, चटनी और तले जाने वाले तेल के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि संभावित बैक्टीरियल या रसायनिक प्रदूषण की पुष्टि हो सके। साथ ही, विक्रेता के लाइसेंस की वैधता और खाद्य प्रबंधन प्रथाओं की भी जाँच की जा रही है।

भविष्य की दिशा और सार्वजनिक सलाह

यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक चेतावनी है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ सड़क भोजन का सेवन रोजमर्रा का हिस्सा है। विशेषज्ञों ने नागरिकों को अनजान स्रोतों से भोजन न लेने, साफ़ पानी से हाथ धोने और विक्रेताओं के स्वच्छता मानकों पर सतर्क रहने की सलाह दी है। साथ ही, राज्य स्तर पर खाद्य सुरक्षा निरीक्षण को सुदृढ़ करने और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियानों को तेज़ करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।