चेन्नई के SIMS अस्पताल के डॉक्टरों ने एक जटिल एंडोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से 84 वर्षीय बुजुर्ग को फिर से चलने में सक्षम बनाया। मात्र 8 मिमी के चीरे के साथ की गई इस सफल सर्जरी ने चिकित्सा जगत में नई मिसाल कायम की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 84 वर्षीय मरीज को गंभीर स्पाइनल स्टेनोसिस और स्कोलियोसिस की समस्या थी।
- SIMS अस्पताल में मात्र 8 मिमी के सिंगल-इंसीजन (एकल चीरा) एंडोस्कोपिक सर्जरी की गई।
- मरीज को हृदय संबंधी जटिलताएं और पेसमेकर भी लगा हुआ था, जिससे सर्जरी जोखिम भरी थी।
- इस आधुनिक तकनीक से रक्त की हानि कम हुई और मरीज का रिकवरी समय काफी घट गया।
चेन्नई: चिकित्सा विज्ञान की प्रगति ने अब उम्र और जटिल स्वास्थ्य स्थितियों को चुनौती देना शुरू कर दिया है। चेन्नई के प्रतिष्ठित SIMS अस्पताल ने एक अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए 84 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति को फिर से आत्मनिर्भर और गतिशील बना दिया है। यह मरीज न केवल गंभीर रीढ़ की हड्डी की समस्याओं से जूझ रहा था, बल्कि हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण एक सामान्य सर्जरी के लिए भी अत्यधिक जोखिम भरा था।
जटिल चिकित्सा स्थिति और चुनौतियाँ
मरीज को मल्टी-लेवल लम्बर स्पाइनल स्टेनोसिस और डिजेनरेटिव स्कोलियोसिस (रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन) जैसी गंभीर समस्याएं थीं। इस स्थिति के कारण निचली पीठ की नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा था, जिससे मरीज को चलने-फिरने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी। स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाने वाली बात यह थी कि मरीज का पहले कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट (CABG) ऑपरेशन हो चुका था और उनके शरीर में एक कार्डियक पेसमेकर भी लगा हुआ था। ऐसी स्थिति में पारंपरिक ओपन स्पाइन सर्जरी करना जानलेवा साबित हो सकता था।
एंडोस्कोपिक तकनीक: एक आधुनिक समाधान
डॉक्टरों की टीम, जिसका नेतृत्व वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ जी. वेंकटेश कुमार और विग्नेश जयबालन ने किया, ने पारंपरिक सर्जरी के बजाय 'फुल-एंडोस्कोपिक यूनिपोरल डीकंप्रेशन' का विकल्प चुना। इस प्रक्रिया में केवल 8 मिमी का एक छोटा सा चीरा लगाया गया। पारंपरिक सर्जरी में जहां पेडल स्क्रू और रॉड का उपयोग करके रीढ़ को ठीक किया जाता है, वहीं इस तकनीक ने बिना किसी बड़े कट के नसों के दबाव को कम कर दिया।
तकनीकी श्रेष्ठता और भविष्य की राह
इस प्रक्रिया की सफलता का मुख्य कारण न्यूनतम आक्रामक (minimally invasive) दृष्टिकोण था। इससे मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों को न्यूनतम क्षति पहुँची, रक्त की हानि नगण्य रही और मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द का सामना नहीं करना पड़ा। SIMS अस्पताल के चेयरमैन रवि पचमुथु ने कहा कि अस्पताल भविष्य में भी जटिल ऑर्थोपेडिक प्रक्रियाओं के लिए उन्नत तकनीकों में निवेश करना जारी रखेगा। यह मामला दर्शाता है कि कैसे मल्टी-डिसिप्लिनरी दृष्टिकोण और आधुनिक एंडोस्कोपिक उपकरण वृद्ध आबादी के लिए जीवन बदलने वाले साबित हो सकते हैं।