वेल्लोर में कलाईनगर सेंटरनी सरकारी बोर्डिंग सुविधा अभी तक खुली नहीं है क्योंकि किराया तय करने में देरी हो रही है। इस कारण आसपास के जिलों और राज्य के रोगी तथा पर्यटक महँगे और खराब स्थितियों वाले निजी आवासों में रह रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- किराया तय न होने से 5 महीनों से नई सरकारी बोर्डिंग बंद
- रोगियों और पर्यटकों को निजी महँगे आवासों में रहना पड़ रहा
- सरकारी सुविधा में 119 कमरे, सौर ऊर्जा, सुरक्षा और सस्ती दरें
वेल्लोर के पेरुमुगे गांव में स्थित ₹45.91 करोड़ की कलाईनगर सेंटरनी सरकारी बोर्डिंग एवं लॉजिंग सुविधा, जो रोगी के रिश्तेदारों के लिए बनाई गई थी, अभी भी बंद है। यह देरी मुख्यतः किराया दरों को अंतिम रूप न देने के कारण है, जिससे प्रशासनिक कागजी कार्यवाही थमती रहती है।
पृष्ठभूमि और उद्घाटन
फरवरी 2026 में पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन द्वारा उद्घाटित इस तीन-मंजिला परिसर में 119 कमरे और कम से कम 250 बिस्तर हैं, जिसमें 48 दो-बेड वाले कमरे भी शामिल हैं। सुविधा में लिफ्ट, विस्तृत विज़िटर हॉल, सौर ऊर्जा द्वारा संचालित प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी, पार्किंग और बिटुमेन सड़क जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
किराया निर्धारण में अटकलें
पिछले पाँच महीनों में जिला प्रशासन ने दो बार राज्य सरकार को किराया दरें प्रस्तावित कीं, जो स्थानीय मौजूदा किरायों के आधार पर थीं, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इस कारण, पीडितों के रिश्तेदार और पर्यटक निजी मक़ान व मोटल में अत्यधिक किराए पर रह रहे हैं, जहाँ सुविधाएँ भी न्यूनतम हैं।
स्थानीय प्रभाव और संभावित लाभ
वेल्लोर में लगभग 250 निजी लॉज मौजूद हैं, जो अक्सर भीड़‑भाड़ और खराब रोशनी वाले होते हैं। नई सरकारी सुविधा का खुलना इन समस्याओं का सीधा समाधान होगा, विशेषकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षा बढ़ाने में। इसके अलावा, सौर ऊर्जा पर निर्भरता और जल संरक्षण जैसी पर्यावरण‑सचेत पहलें राज्य के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
आगे की राह
यदि किराया दरें शीघ्र तय हो जाती हैं, तो यह सुविधा न केवल रोगियों के खर्च को कम करेगी, बल्कि वेल्लोर के स्वास्थ्य‑पर्यटन को भी प्रोत्साहन देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर संचालन से निजी आवास बाजार की कीमतों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और समग्र रोगी देखभाल में सुधार होगा।