अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन (ADA) ने एक संपादकीय को प्रकाशित करने से रोका, जिससे पाँच प्रमुख वैज्ञानिकों को बाहर कर दिया गया। अब वही लेख और सात राय लेख प्रीप्रिंट सर्वर पर प्रकाशित कर वैज्ञानिकों ने संगठन की कार्रवाई को उजागर किया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ADA ने "Diabetes Care" के संपादकीय को प्रकाशित नहीं किया, जिससे वैज्ञानिकों को बाहर कर दिया गया।
- विरोधी लेख को प्रीप्रिंट सर्वर पर एक ही PDF में अपलोड किया गया।
- लेख में दावा किया गया है कि ADA ने पहले से ही इस वितरण की योजना बना ली थी।
अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन (ADA) 1950 के दशक में स्थापित एक प्रमुख स्वास्थ्य संस्था है, जो डायबिटीज़ के शोध, रोगी शिक्षा और नीति निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाती आई है। 2022 तक, इसका आधिकारिक जर्नल Diabetes Care विश्व स्तर पर उच्च प्रतिष्ठित माना जाता रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में संस्था को विज्ञान पर राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ा, विशेषकर ट्रम्प प्रशासन के दौरान विज्ञान पर निशाना साधे गए कदमों के कारण।
जून 5 को न्यू ऑरलियन्स में आयोजित वार्षिक सम्मेलन में पाँच प्रमुख वैज्ञानिकों को हटाया गया, जब उन्होंने अप्रैल में प्रकाशित एक संपादकीय की प्रतियां वितरित कीं, जिसमें ट्रम्प प्रशासन की वैज्ञानिक अनुसंधान पर लगातार हमलों की कड़ी निंदा की गई थी। इस घटना पर सार्वजनिक आक्रोश हुआ और अंततः ADA के सीईओ ने व्यक्तिगत माफी जारी की, लेकिन संस्थान की प्रतिक्रिया अभी भी विवाद का कारण बनी हुई है।
अब Diabetes Care के डिप्टी एडिटर्स ने उस संपादकीय और सात संबंधित राय लेखों को एक ही PDF फ़ाइल में प्रीप्रिंट सर्वर पर अपलोड किया है, यह दावा करते हुए कि ADA ने उन्हें प्रकाशित करने से इनकार कर दिया। इन लेखों में एक नई दलील पेश की गई है कि ADA के नेतृत्व को पहले से ही पता था कि सदस्य संपादकीय की प्रतियां वितरित करेंगे, और उन्होंने सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय पुलिस की मदद से एक जाल बिछाया था। यह निर्णय संभवतः पिछले वर्ष आयोजित एक सत्र से जुड़ी तनावपूर्ण स्थितियों के कारण था।
Why This Matters (इसके मायने क्या हैं)
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, इस विवाद का प्रभाव न केवल वैज्ञानिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ता है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में विश्वास की कमी भी उत्पन्न करता है। जब प्रमुख संस्थाएं राजनीतिक दबाव के तहत शोध को रोकती हैं, तो रोगियों को वैध उपचार और नई खोजों से वंचित किया जा सकता है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य लागत बढ़ती है।
इसके अलावा, इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि वैज्ञानिक समुदाय अब पारंपरिक प्रकाशन चैनलों से हटकर प्रीप्रिंट जैसे वैकल्पिक माध्यमों का उपयोग कर रहा है। यह बदलाव प्रकाशन की पारदर्शिता को बढ़ाता है, लेकिन साथ ही संस्थागत जवाबदेही को भी चुनौती देता है, क्योंकि अब शोधकर्ता सीधे जनता तक पहुँच सकते हैं, बिना संस्थागत फ़िल्टर के।
"संकट के समय में वैज्ञानिकों को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए नई रणनीतियों की जरूरत होती है, और प्रीप्रिंट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है," कहा डॉ. एलेना मार्टिनेज, डायबिटीज़ रिसर्च फेलो।
| पहलू | ADA की स्थिति | वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया |
|---|---|---|
| संपादकीय प्रकाशन | रोक दिया गया | प्रीप्रिंट पर अपलोड किया गया |
| सुरक्षा प्रबंधन | पूर्व योजना के साथ जाल बिछाया | विरोधी प्रतियां वितरित की गईं |
| सार्वजनिक प्रतिक्रिया | माफी और क्षमा | पारदर्शिता की मांग |
Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: क्या ADA ने वास्तव में संपादकीय को सार्वजनिक करने से इनकार किया?
उत्तर: हाँ, आधिकारिक जर्नल ने लेख को प्रकाशित नहीं किया, और इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसे प्रीप्रिंट पर साझा किया।
प्रश्न 2: इस विवाद का डायबिटीज़ रोगियों पर क्या असर पड़ सकता है?
उत्तर: यदि वैज्ञानिक अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध रहता है, तो नई उपचार विधियों और नीति सुधारों में देरी हो सकती है, जिससे रोगियों की देखभाल प्रभावित होगी।