विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत को लक्षणों के दिखने का इंतजार करने के बजाय नियमित स्क्रीनिंग और कैंसर की प्रारंभिक पहचान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हालिया डेटा में निवारक जांच में भारी वृद्धि देखी गई है।
मुख्य बातें
- कैंसर की रोकथाम के लिए लक्षणों का इंतजार करने के बजाय नियमित स्क्रीनिंग अनिवार्य है।
- दिल्ली-एनसीआर में कैंसर से संबंधित जांचों में 32% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- PSA परीक्षणों में 280% और पैप स्मीयर में 83% की भारी बढ़त देखी गई है।
हाल ही में महाजन इमेजिंग एंड लैब्स द्वारा आयोजित एक वेबिनार में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की स्वास्थ्य रणनीति का मुख्य स्तंभ कैंसर की रोकथाम और प्रारंभिक पहचान होनी चाहिए। ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और लैब विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में हमारी पद्धति 'लक्षण-आधारित निदान' की है, जिसे बदलकर 'नियमित स्क्रीनिंग' की ओर ले जाने की आवश्यकता है।
इस निवारक स्वास्थ्य देखभाल की ओर बढ़ते रुझान को डेटा से भी समर्थन मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 और जून 2026 के बीच दिल्ली-एनसीआर में कैंसर से संबंधित नैदानिक जांचों में 32% की वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि लोग अब बीमारी होने के बाद नहीं, बल्कि उससे बचने के लिए जांच करवा रहे हैं।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कैंसर के मामलों में शुरुआती पहचान से न केवल जीवित रहने की दर (survival rate) में सुधार होता है, बल्कि उपचार की लागत में भी भारी कमी आती है। जब कैंसर का पता शुरुआती चरणों में चलता है, तो उपचार कम आक्रामक और अधिक प्रभावी होता है।
"कैंसर स्क्रीनिंग को स्वास्थ्य देखभाल का एक नियमित हिस्सा बनना चाहिए, न कि कुछ ऐसा जिसे लोग केवल लक्षण दिखने के बाद ही सोचें।" - हर्ष महाजन
जांच के प्रकारों में वृद्धि के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जो समाज में बढ़ती जागरूकता को दर्शाते हैं। विशेष रूप से प्रोस्टेट स्वास्थ्य और महिला स्वास्थ्य के प्रति लोगों का दृष्टिकोण बदल रहा है।
| जांच का प्रकार | वृद्धि का प्रतिशत |
|---|---|
| PSA (प्रोस्टेट) परीक्षण | 280% |
| पैप स्मीयर (गर्भाशय ग्रीवा) | 83% |
| मैमोग्राफी (स्तन) | 26% |
ऐतिहासिक रूप से, भारत में कैंसर का पता अक्सर उन्नत चरणों में चलता है, जिसके कारण मृत्यु दर अधिक होती है। हालांकि, वर्तमान रुझान इस दिशा में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. प्रारंभिक जांच क्यों जरूरी है?
शुरुआती जांच से कैंसर का पता शुरुआती चरणों में चलता है, जिससे इलाज आसान और सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
2. क्या स्क्रीनिंग केवल लक्षणों के होने पर करनी चाहिए?
नहीं, विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रीनिंग नियमित होनी चाहिए, भले ही आपको कोई लक्षण महसूस न हो रहे हों।