केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में हेक्सावलेंट (छह-इन-वन) वैक्सीन को शामिल करने से बच्चों को कम इंजेक्शन लगेंगे और स्वास्थ्य प्रणाली की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

मुख्य बातें

  • हेक्सावलेंट वैक्सीन एक ही इंजेक्शन में 6 बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है।
  • इससे स्वास्थ्य कर्मियों पर काम का बोझ कम होगा और कोल्ड-चैन की आवश्यकताएं घटेंगी।
  • अध्ययन के अनुसार, वैक्सीन की कीमत में 50% कमी आने पर यह आर्थिक रूप से अत्यधिक फायदेमंद होगा।

भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में हेक्सावलेंट (छह-इन-वन) वैक्सीन को शामिल करने से देश के बाल टीकाकरण कार्यक्रम की दक्षता में क्रांतिकारी सुधार हो सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ इंडिया सहित कई प्रमुख संगठनों द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है।

हेक्सावलेंट वैक्सीन एक संयोजन टीका है जो शिशुओं को डिप्थीरिया, टिटनेस, पर्टुसिस (काली खांसी), हेपेटाइटिस बी, हिब (Hib), और पोलियो जैसी बीमारियों से एक ही इंजेक्शन के माध्यम से सुरक्षा प्रदान करता है। वर्तमान में, भारत में सालाना लगभग 2.6 करोड़ बच्चों का टीकाकरण किया जाता है, जिन्हें कई अलग-अलग इंजेक्शनों की आवश्यकता होती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। हेक्सावलेंट वैक्सीन के आने से न केवल बच्चों को कम दर्दनाक इंजेक्शन लगेंगे, बल्कि यह देखभाल करने वालों (Caregivers) का समय भी बचाएगा और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के बोझ को कम करेगा।

संयोजन टीके टीकाकरण कार्यक्रमों को सरल बनाने के साथ-साथ परिवारों और स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए सुविधा में सुधार के लिए लंबे समय से पहचाने जाते रहे हैं।

अध्ययन में दो कार्यान्वयन परिदृश्यों का आकलन किया गया: वर्तमान पेंटावलेंट और IPV खुराक को हेक्सावलेंट से बदलना, और बूस्टर खुराक के रूप में इसका उपयोग करना। शोधकर्ताओं ने पाया कि हालांकि वैक्सीन की खरीद लागत अधिक हो सकती है, लेकिन परिचालन और प्रणालीगत बचत इस अतिरिक्त लागत की भरपाई कर सकती है, बशर्ते वैक्सीन की कीमत में 50% की कमी आए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने दशकों से अपने टीकाकरण ढांचे को मजबूत किया है। पेंटावलेंट वैक्सीन (5-in-1) के आने के बाद से ही टीकाकरण की प्रक्रिया सरल हुई थी। अब हेक्सावलेंट की ओर कदम बढ़ाना भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में अगला बड़ा विकास माना जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: हेक्सावलेंट वैक्सीन का उपयोग करने से कोल्ड-चैन (वैक्सीन को ठंडा रखने की व्यवस्था) की रसद संबंधी आवश्यकताओं में काफी कमी आती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. हेक्सावलेंट वैक्सीन किन बीमारियों से बचाती है?
यह डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी, हिब और पोलियो से सुरक्षा प्रदान करती है।

2. क्या इससे स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ कम होगा?
हाँ, यह स्वास्थ्य कर्मियों के काम को आसान बनाती है और कम इंजेक्शनों के कारण टीकाकरण सत्रों की दक्षता बढ़ाती है।