आगरा के फतेहपुर सीकरी में खाद्य विभाग ने 1,800 किलोग्राम सेलखड़ी और 1,350 किलोग्राम मिलावटी आटा जब्त किया। लाइसेंस के भटकाव के कारण फैक्ट्री की मशीनें सील कर दी गईं, जिससे आटा उत्पादन रुक गया।
मुख्य बिंदु
- 1,800 किग्रा सेलखड़ी का बरामद
- 1,350 किग्रा मिलावटी आटा जब्त
- फैक्ट्री की मशीनें सील, उत्पादन बंद
फैक्ट्री में मिली बड़ी मात्रा में सेलखड़ी
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के फतेहपुर सीकरी में खाद्य विभाग ने एक तेल‑मसाला लाइसेंस वाली इकाई पर छापेमारी की, जहाँ आटा तैयार किया जा रहा था। जांच में लगभग 1,800 किलोग्राम सेलखड़ी (सोपस्टोन) और 1,350 किलोग्राम मिलावटी आटा बरामद किया गया।
सेलखड़ी मिलावट का उद्देश्य
एफएसडीए के अधिकारियों के अनुसार, सेलखड़ी को आटे में मिलाकर उसकी चमक बढ़ाई जाती है और घटिया गेहूँ के आटे को सफेद दिखाया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह आटे का वजन बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। सेलखड़ी मुख्यतः टैल्क (Talc) से बनी एक प्राकृतिक खनिज‑पत्थर है, जिसे पाउडर रूप में कई उद्योगों में उपयोग किया जाता है।
कदम और प्रतिबंध
छापे के बाद, विभाग ने फतेहपुर सीकरी थाने में FIR दर्ज कराई और लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू की। साथ ही, आटा निर्माण में प्रयुक्त सभी मशीनों को सील कर दिया गया, जिससे इस प्रतिष्ठान में आगे की कोई उत्पादन नहीं हो सकेगी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such large‑scale adulteration not only endangers consumer health but also erodes trust in the regional food supply chain, prompting stricter enforcement of the Food Safety and Standards Act.
"सेलखड़ी की मिलावट से आहार‑सुरक्षा जोखिम बढ़ता है; नियामक निगरानी को सख्त करने की आवश्यकता है," कहा खाद्य विशेषज्ञ डॉ. अर्पित सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सेलखड़ी क्या है और इसे आटे में क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर: यह एक प्राकृतिक खनिज‑पत्थर है, जो आटे की चमक बढ़ाने और वजन बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है, जिससे उपभोक्ता को धोखा दिया जाता है।
प्रश्न 2: विभाग ने अब कौन‑सी कार्रवाई की है?
उत्तर: 1,800 किग्रा सेलखड़ी और 1,350 किग्रा आटा जब्त, मशीनें सील, लाइसेंस निलंबन, और आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए जांच जारी।