तमिलनाडु ने जागरूकता और बुनियादी ढांचे में निवेश करके अंगदान के क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है। राज्य अब देश के सबसे सफल अंगदान केंद्रों में से एक बन गया है।
मुख्य बातें
- तमिलनाडु में अंगदान की संख्या 2008 के 7 मामलों से बढ़कर 2024 में 268 हो गई है।
- देश के कुल मृत अंगदानों का एक बड़ा हिस्सा पांच दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में होता है।
- राज्य सरकार द्वारा मृतक दाताओं को 'राज्य सम्मान' देना जागरूकता का एक बड़ा कारण बना है।
तमिलनाडु ने पिछले 17 वर्षों में अंगदान के प्रति सार्वजनिक धारणा को बदलने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। वर्ष 2008 में जहां केवल 7 अंगदान हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 268 तक पहुंच गई। यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के स्वास्थ्य ढांचे और लोगों के बीच बढ़ते विश्वास का परिणाम है।
ट्रांसप्लांट अथॉरिटी ऑफ तमिलनाडु के अनुसार, वर्ष 2025 में 266 दाताओं ने अपने अंगों का दान किया, जिससे कुल 1,476 अंगों और ऊतकों का उपयोग किया जा सका। इसमें 856 प्रमुख अंग और 620 छोटे अंग शामिल थे। यह सफलता दर्शाती है कि कैसे निरंतर प्रयासों से एक कठिन सामाजिक चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, तमिलनाडु की सफलता का राज केवल चिकित्सा तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता है। जब परिवारों को यह विश्वास हो जाता है कि उनके प्रियजन की मृत्यु के बाद उनके अंग किसी का जीवन बचा सकते हैं, तो वे स्वेच्छा से आगे आते हैं। तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में, 10 से 15% परिवार अंगदान के लिए तैयार हो जाते हैं, जो एक बहुत बड़ा बदलाव है।
"शुरुआत में डॉक्टरों और जनता दोनों में हिचकिचाहट थी, लेकिन निरंतर संवाद और पारदर्शिता ने इस अंतर को पाट दिया है।"
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता फैलाने के दो मुख्य तरीके हैं: पहला, सार्वजनिक अभियान और दूसरा, सफल दान की कहानियों को साझा करना। तमिलनाडु में 'ऑनर्स वॉक' और दाताओं को राजकीय सम्मान देने की नीति ने लोगों के मन में सम्मान की भावना पैदा की है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अंगदान कार्यक्रम की शुरुआत अप्रैल 2008 में हुई थी। उस समय 'ब्रेन डेथ' (मस्तिष्क मृत्यु) की अवधारणा को समझना भी डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण था। 15 वर्षीय हितेंद्रन का मामला, जिन्होंने सड़क दुर्घटना के बाद अंगदान किया था, इस राज्य में अंगदान आंदोलन की नींव बना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. तमिलनाडु में अंगदान की दर कैसे बढ़ी?
निरंतर जागरूकता अभियानों, बेहतर अस्पताल बुनियादी ढांचे और दाताओं को राजकीय सम्मान देने के कारण इसमें वृद्धि हुई है।
2. क्या सरकारी अस्पताल इसमें योगदान देते हैं?
हाँ, तमिलनाडु में रिकॉर्ड संख्या में होने वाले अंगदानों में 50% से अधिक योगदान सरकारी अस्पतालों का है।