अभिनेत्री बिपशा बसु ने ऑस्टियोआर्थराइटिस के अपने संघर्ष के बारे में बात की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों ने बताया है कि कैसे सही जीवनशैली और समय पर इलाज से इससे बचा जा सकता है।

मुख्य बातें

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस केवल उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं है, यह युवाओं को भी प्रभावित कर सकती है।
  • चोट, मोटापा और अत्यधिक शारीरिक तनाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
  • सही व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव से जोड़ों के दर्द को प्रबंधित किया जा सकता है।

बॉलीवुड अभिनेत्री बिपशा बसु ने हाल ही में अपने एक निजी स्वास्थ्य संघर्ष का खुलासा किया है जिसने उनके करियर को लगभग प्रभावित कर दिया था। बिपशा ने बताया कि लगभग सात साल पहले उन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) होने का पता चला था। उस समय डॉक्टरों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि शायद वह फिर कभी डांस न कर पाएं या एक्शन सीन न कर सकें।

बिपशा ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा, "उस समय मैं बहुत छोटी थी और मुझे लगा कि यह मेरे साथ नहीं हो सकता। डॉक्टरों ने कहा कि मुझे ज्यादातर समय बैठकर रहना होगा। इसने मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया था।"

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों के बढ़ते स्तर के कारण, युवा वयस्कों में जोड़ों की समस्याओं के मामले बढ़ रहे हैं। बिपशा का अनुभव उन लाखों युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो अपनी फिटनेस और करियर के प्रति अत्यधिक सक्रिय हैं लेकिन जोड़ों के स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं।

"ऑस्टियोआर्थराइटिस को अक्सर उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन चोट और जीवनशैली के कारण यह युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है।"

युवाओं में ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए केवल उम्र ही जिम्मेदार नहीं है। इसके अन्य मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • पुरानी चोटें: लिगामेंट टियर या फ्रैक्चर जैसी पुरानी चोटें।
  • शारीरिक तनाव: पेशेवर एथलीटों या डांसर्स पर जोड़ों का अत्यधिक दबाव।
  • मोटापा: शरीर का अधिक वजन जोड़ों पर अतिरिक्त भार डालता है।
  • आनुवंशिकी: परिवार में पहले से किसी को यह समस्या होना।

व्यायाम और प्रबंधन

डॉ. आशीष चौधरी के अनुसार, ऑस्टियोआर्थराइटिस का मतलब शारीरिक गतिविधि को पूरी तरह छोड़ देना नहीं है। इसके बजाय, कम प्रभाव वाले व्यायाम (Low-impact exercises) जैसे कि तैरना, योग, साइकिल चलाना और पैदल चलना जोड़ों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। ये व्यायाम जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं, जिससे दर्द कम होता है।

क्या आप जानते हैं?: नियमित रूप से मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करने से जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव 30% तक कम हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या ऑस्टियोआर्थराइटिस को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है?

उत्तर: कार्टिलेज (cartilage) की मरम्मत की क्षमता सीमित होती है, इसलिए इसे पूरी तरह रिवर्स करना कठिन है, लेकिन सही उपचार से इसके बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है।

प्रश्न 2: क्या वजन कम करना जोड़ों के दर्द में मदद करता है?

उत्तर: हाँ, वजन कम करने से जोड़ों पर पड़ने वाला मैकेनिकल लोड कम होता है, जिससे दर्द में महत्वपूर्ण राहत मिलती है।