गोवा सरकार ने IISc बेंगलुरु द्वारा विकसित 'आरोग्य आरोहण' AI टूल के माध्यम से मौखिक कैंसर की जल्द पहचान शुरू की है। यह तकनीक ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कैंसर के मामलों का समय रहते पता लगाने में मदद कर रही है।

  • IISc बेंगलुरु द्वारा विकसित 'आरोग्य आरोहण' AI टूल का उपयोग।
  • पनाजी और बेटकी गांव में पायलट प्रोजेक्ट का सफल क्रियान्वयन।
  • बिना इंटरनेट के भी तुरंत संदिग्ध मामलों की पहचान करने में सक्षम।
  • भारत में मौखिक कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने की दिशा में बड़ा कदम।

गोवा सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए मौखिक कैंसर (Oral Cancer) के पता लगाने और उपचार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाया है। इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत राज्य की राजधानी पनाजी और पोंडा के पास स्थित बेटकी गांव में की गई है, जिसका उद्देश्य शुरुआती चरणों में ही कैंसर का पता लगाकर मृत्यु दर को कम करना है।

इस पूरी पहल को भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु द्वारा विकसित AI-आधारित स्क्रीनिंग टूल 'आरोग्य आरोहण' संचालित कर रहा है। यह एक मोबाइल-आधारित एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य कार्यकर्ता मरीज के मुंह के अंदर की तस्वीरें लेते हैं। AI एल्गोरिदम इन तस्वीरों का विश्लेषण करता है और अल्सर या अन्य असामान्यताओं की पहचान करता है। यदि टूल किसी मामले को 'उच्च जोखिम' (High-risk) के रूप में चिह्नित करता है, तो मरीज को तुरंत टेलीमेडिसिन के माध्यम से दंत चिकित्सकों के पास भेजा जाता है, और आवश्यकता पड़ने पर बायोप्सी के लिए गोवा डेंटल कॉलेज रेफर किया जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत में मौखिक कैंसर का बोझ वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और जागरूकता के अभाव के कारण 70% मामले अंतिम चरणों में सामने आते हैं। 'आरोग्य आरोहण' जैसे टूल्स स्वास्थ्य सेवाओं का लोकतंत्रीकरण कर रहे हैं, जिससे दूर-दराज के गांवों में भी विशेषज्ञ स्तर की स्क्रीनिंग संभव हो पा रही है।

"AI-आधारित स्क्रीनिंग न केवल समय बचाती है, बल्कि मानवीय त्रुटियों को कम कर शुरुआती चरणों में सटीक निदान सुनिश्चित करती है।"

तकनीकी रूप से, यह टूल अत्यंत उन्नत है क्योंकि यह 'व्हाइट-लाइट' इमेजिंग का उपयोग करता है और ऑफलाइन मोड में भी काम कर सकता है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा टूल है जो बिना इंटरनेट कनेक्शन के पॉइंट-ऑफ-केयर पर तत्काल परिणाम प्रदान करता है। इसे CDSCO से परीक्षण लाइसेंस मिल चुका है और मार्केटिंग लाइसेंस की प्रक्रिया जारी है।

अब तक के आंकड़ों के अनुसार, गोवा में लगभग 259 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जिनमें से 114 मामले संदिग्ध पाए गए और 8 लोगों में मौखिक कैंसर की पुष्टि हुई। यह परियोजना अब तमिलनाडु के तंजावुर और उत्तर प्रदेश के मथुरा में भी लागू की जा रही है, और जल्द ही नागालैंड में भी इसे शुरू किया जाएगा।

विशेषता पारंपरिक स्क्रीनिंग AI-आधारित (आरोग्य आरोहण)
विधि विजुअल एग्जामिनेशन (नग्न आंखों से) AI इमेज एनालिसिस
गति विशेषज्ञ की उपलब्धता पर निर्भर तत्काल (Instant)
पहुंच मुख्यतः शहरी अस्पतालों तक सीमित घर-घर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
इंटरनेट आवश्यकता लागू नहीं ऑफलाइन कार्य करने में सक्षम
क्या आप जानते हैं?: भारत में हर साल मौखिक कैंसर के 1,40,000 से अधिक नए मामले सामने आते हैं और लगभग 80,000 लोगों की मृत्यु हो जाती है।

Frequently Asked Questions

1. आरोग्य आरोहण टूल कैसे काम करता है?
यह मोबाइल फोन के कैमरे से मुंह की तस्वीरें लेता है और AI के जरिए संदिग्ध घावों या अल्सर की पहचान कर उन्हें 'ऑरेंज' (संदिग्ध) या 'ब्लू' (सामान्य) संकेत में वर्गीकृत करता है।

2. क्या इसके लिए इंटरनेट की आवश्यकता होती है?
नहीं, यह टूल ऑफलाइन मोड में भी काम कर सकता है, जो इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाता है।