गाजा युद्ध ने इजरायली सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात किया है, जिससे PTSD और डिप्रेशन के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। हजारों सैनिक अब फ्लैशबैक और बुरे सपनों के साये में जी रहे हैं।

  • 7 अक्टूबर के बाद लगभग 11,000 इजरायली सैनिकों में गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान हुई है।
  • PTSD के मामलों में लगभग 40% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इजरायल के सैन्य इतिहास में एक चिंताजनक स्तर है।
  • सिर्फ शारीरिक चोटें ही नहीं, बल्कि गंध और आवाजों जैसे 'ट्रिगर' सैनिकों को युद्ध के ट्रॉमा में वापस ले जा रहे हैं।

इजरायली रक्षा बलों (IDF) को दुनिया की सबसे आधुनिक और शक्तिशाली सेनाओं में गिना जाता है, लेकिन गाजा में लंबे समय तक चले युद्ध ने एक ऐसी सच्चाई सामने ला दी है जिसे टैंकों और मिसाइलों से नहीं जीता जा सकता। मोर्चे से लौटे हजारों सैनिक अब एक अदृश्य दुश्मन से लड़ रहे हैं—पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)

रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल के रक्षा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद से करीब 11,000 सैनिकों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चोटों की पहचान की गई है। इनमें एंग्जायटी, डिप्रेशन और गंभीर अनिद्रा शामिल है। यह संख्या इतनी अधिक है कि यह इजरायल के पिछले सभी संघर्षों के कुल मानसिक स्वास्थ्य मामलों के एक बड़े हिस्से के बराबर है।

PTSD: जब दिमाग युद्ध क्षेत्र में ही रह जाता है

PTSD एक ऐसी स्थिति है जो किसी जानलेवा या डरावनी घटना के बाद विकसित होती है। सैनिकों के लिए, यह केवल यादें नहीं हैं, बल्कि 'फ्लैशबैक' हैं। एक पूर्व सैनिक ने साझा किया कि कैसे ड्रोन की आवाज या किसी का चिल्लाना उसे वापस उसी युद्ध क्षेत्र में ले जाता है। कुछ सैनिकों के लिए, गंध सबसे बड़ा ट्रिगर बन गई है; शवों को इकट्ठा करने के दौरान महसूस की गई गंध अब उनके दैनिक जीवन की मामूली चीजों में भी महसूस होती है, जो उन्हें पैनिक अटैक की ओर ले जाती है।

"युद्ध का ट्रॉमा केवल दृश्यों तक सीमित नहीं होता, यह गंध और ध्वनि के माध्यम से मस्तिष्क के गहरे हिस्सों में अंकित हो जाता है, जिससे सामान्य जीवन में वापसी कठिन हो जाती है।"

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह संकट केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि रणनीतिक है। जब एक बड़ी संख्या में रिजर्व सैनिक मानसिक रूप से टूट जाते हैं, तो यह सेना की दीर्घकालिक परिचालन क्षमता (Operational Capability) को प्रभावित करता है। बार-बार मोर्चे पर तैनाती और रिकवरी के लिए समय की कमी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।

लक्षण सामान्य तनाव PTSD (युद्ध ट्रॉमा)
नींद कठिनाई से नींद आना भयानक डरावने सपने और रात में अचानक जागना
प्रतिक्रिया चिड़चिड़ापन तेज आवाज से अत्यधिक घबराहट (Hyperarousal)
स्मृति घटना की याद आना फ्लैशबैक (ऐसा महसूस होना कि घटना अभी हो रही है)

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से जुलाई 2025 के बीच 279 सैनिकों ने आत्महत्या का प्रयास किया, जो इस मानसिक संकट की भयावहता को दर्शाता है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट रोनन सिडी के अनुसार, यह ट्रॉमा दो हिस्सों में बंटा है: एक मरने का डर और दूसरा 'नैतिक आघात' (Moral Injury), जहाँ सैनिक अपने द्वारा लिए गए फैसलों के कारण अपराधबोध से जूझते हैं।

Did You Know?: PTSD केवल सैनिकों को नहीं, बल्कि सामान्य आबादी को भी प्रभावित करता है; इजरायल में सामान्य नागरिकों में PTSD के निदान में 70% की वृद्धि देखी गई है।

Frequently Asked Questions

1. क्या PTSD का इलाज संभव है?
हाँ, थेरेपी, काउंसलिंग और कुछ मामलों में दवाओं के माध्यम से इसे प्रबंधित किया जा सकता है, हालांकि इसमें लंबा समय लगता है।

2. 'नैतिक आघात' (Moral Injury) क्या है?
यह वह मानसिक संघर्ष है जो तब होता है जब कोई व्यक्ति ऐसी घटना का हिस्सा बनता है जो उसके व्यक्तिगत नैतिक मूल्यों के विपरीत हो।