स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी बुजुर्गों के लिए पहले के अनुमान से कहीं अधिक खतरनाक है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की गर्मी सहने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
- बुजुर्गों में 'अनकम्पेंसेबल हीट स्ट्रेस' का खतरा युवाओं की तुलना में बहुत पहले और कम तापमान पर शुरू हो जाता है।
- 2050 तक दुनिया की आबादी में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 2.1 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
- गर्मी से होने वाली मौतों का मुख्य कारण केवल ओवरहीटिंग नहीं, बल्कि हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियाँ भी हैं।
जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ते तापमान ने वैज्ञानिकों के लिए एक नई चिंता पैदा कर दी है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि अत्यधिक गर्मी बुजुर्ग आबादी के लिए पहले के अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक घातक साबित हो रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मानव शरीर की गर्मी सहने की सीमा उम्र के साथ तेजी से घटती है, जिससे हीटवेव के दौरान जोखिम का स्तर काफी बढ़ जाता है।
अध्ययन के अनुसार, पिछले आकलन अक्सर यह मान लेते थे कि सभी लोग एक स्वस्थ युवा वयस्क की तरह गर्मी सहन कर सकते हैं। लेकिन यह धारणा गलत थी। इंपीरियल कॉलेज लंदन के सीनियर लेक्चरर क्रिस मुलिंगटन ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि खतरनाक गर्मी को किसी एक सार्वभौमिक तापमान से परिभाषित नहीं किया जा सकता; यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन व्यक्ति गर्मी के संपर्क में है।
बुजुर्ग अधिक संवेदनशील क्यों हैं?
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर की प्राकृतिक रूप से ठंडा होने की क्षमता कम होने लगती है। बुजुर्गों में पसीना कम आता है और रक्त वाहिकाएं उतनी प्रभावी ढंग से नहीं फैलतीं, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस स्थिति को वैज्ञानिक भाषा में "अनकम्पेंसेबल हीट स्ट्रेस" (Uncompensable Heat Stress) कहा जाता है।
शोध में पाया गया कि 1.5 डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान वृद्धि पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग उस स्तर की गर्मी का सामना कर रहे हैं, जिसका अनुभव युवा वयस्क 4 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में करते हैं। यह अंतर बुजुर्गों की अत्यधिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।
खतरनाक गर्मी को केवल एक निश्चित तापमान से नहीं मापा जा सकता, क्योंकि शरीर की प्रतिक्रिया व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बढ़ती उम्र और जलवायु परिवर्तन का मेल एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट पैदा कर रहा है। चूंकि 2050 तक दुनिया की 21% आबादी बुजुर्ग होगी, इसलिए गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा वर्तमान अनुमानों से कहीं अधिक हो सकता है। यह केवल तापमान का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती है।
अध्ययन यह भी स्पष्ट करता है कि गर्मी से होने वाली अधिकांश मौतें केवल शरीर के गर्म होने (हाइपरथर्मिया) से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद बीमारियों जैसे हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी और श्वसन संबंधी समस्याओं के बढ़ने के कारण होती हैं।
Frequently Asked Questions
1. बुजुर्गों के लिए गर्मी सबसे अधिक खतरनाक कब होती है?
जब शरीर का आंतरिक तापमान बढ़ने लगता है और पसीने के माध्यम से शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, जिसे अनकम्पेंसेबल हीट स्ट्रेस कहा जाता है।
2. किन देशों में बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा है?
भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे कम आय वाले देशों में बुजुर्ग आबादी को सबसे अधिक जोखिम है।