कोलकाता के मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने एक 60 वर्षीय मरीज पर जटिल लेजर-गाइडेड रीनल आर्टरी एंजियोप्लास्टी का सफल प्रयोग किया। इस अत्याधुनिक तकनीक ने मरीज के जीवन रक्षक रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद की है।
- 60 वर्षीय मरीज को अत्यधिक उच्च रक्तचाप (220/120 mmHg) की समस्या थी।
- बाएं रीनल आर्टरी में 100% थ्रोम्बोटिक ब्लॉकेज पाया गया।
- डॉ. सौम्या कांति दत्ता के नेतृत्व में लेजर-गाइडेड तकनीक का सफल उपयोग किया गया।
- तकनीक ने क्लॉट को सफलतापूर्वक घोलकर रक्त प्रवाह बहाल कर दिया।
कोलकाता: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, मणिपाल अस्पताल ढाकुरिया के विशेषज्ञों ने एक 60 वर्षीय पुरुष मरीज पर जटिल लेजर-गाइडेड रीनल आर्टरी एंजियोप्लास्टी का सफलतापूर्वक संचालन किया है। यह मामला तब सामने आया जब मरीज अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (Hypertension) और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था।
मरीज को गंभीर सिरदर्द, सीने में बेचैनी, उल्टी, धुंधली दृष्टि और अर्ध-चेतना जैसी आपातकालीन स्थितियों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान उसका रक्तचाप 220/120 mmHg तक पहुंच गया था, जो जीवन के लिए अत्यंत घातक हो सकता था। शुरुआती कोरोनरी एंजियोग्राफी में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का पता चला, लेकिन जब उच्च रक्तचाप के मूल कारण की जांच के लिए रीनल एंजियोग्राफी की गई, तो बाएं रीनल आर्टरी में 100% थ्रोम्बोटिक ब्लॉकेज (खून का थक्का) पाया गया।
तकनीकी चुनौती और समाधान
सामान्यतः ऐसे मामलों में बैलून एंजियोप्लास्टी का उपयोग किया जाता है, लेकिन इस मामले में ब्लॉकेज इतना पूर्ण था कि पारंपरिक तरीके काम नहीं कर सकते थे। यहाँ डॉक्टरों ने लेजर-गाइडेड तकनीक का निर्णय लिया। यह तकनीक न केवल क्लॉट को हटाने में सक्षम है, बल्कि भविष्य में दोबारा ब्लॉकेज होने के जोखिम को भी कम करती है और मरीज के तेजी से स्वस्थ होने में मदद करती है।
लेजर तकनीक ने सफलतापूर्वक क्लॉट को घोल दिया, जिससे रीनल आर्टरी के द्वार पर स्टेंट लगाने में मदद मिली और किडनी में रक्त का प्रवाह सामान्य हो गया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के संगम पर लेजर का यह उपयोग चिकित्सा जगत में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। किडनी की कार्यक्षमता की रक्षा करना जटिल कार्डियोवैस्कुलर मामलों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण है, और यह सफलता उन मरीजों के लिए नई आशा प्रदान करती है जो गंभीर रीनल आर्टरी ऑक्लूजन से पीड़ित हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
रीनल आर्टरी स्टेनोसिस (धमनी का संकुचन) लंबे समय से उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण रहा है। पारंपरिक सर्जरी के बजाय अब मिनिमली इनवेसिव लेजर तकनीकें चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं, जिससे जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है।
Frequently Asked Questions
1. लेजर-गाइडेड एंजियोप्लास्टी पारंपरिक विधि से कैसे बेहतर है?
यह तकनीक पूर्ण ब्लॉकेज को हटाने में अधिक प्रभावी है और रिकवरी की गति को तेज करती है।
2. क्या इससे किडनी की कार्यक्षमता में सुधार होता है?
हाँ, रक्त प्रवाह बहाल होने से किडनी की कार्यक्षमता और मूत्र उत्पादन सामान्य हो जाता है।