आंध्र प्रदेश विधानसभा ने अंगों की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने और अवैध अंगों की तस्करी को रोकने के लिए 'ए.पी. मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित कर दिया है। यह कानून चिकित्सा आवश्यकताओं और नैतिक चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्रीय कानूनों के अनुरूप बनाया गया है।

  • अंगों की मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए नया विधेयक पारित।
  • अंगों और ऊतकों (tissues) की तस्करी रोकने के लिए कड़े प्रावधान।
  • 'निकट संबंधी' की परिभाषा का विस्तार, जिसमें दादा-दादी और पोते-पोती शामिल।
  • विदेशी नागरिकों के लिए सख्त प्राधिकरण समिति की मंजूरी अनिवार्य।

विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ए.पी. मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण विधायी परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य राज्य में अंगों की भारी मांग और सीमित आपूर्ति के बीच के अंतर को भरना और अंगों की अवैध तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाना है।

वर्तमान में, राज्य में मानव अंगों का प्रत्यारोपण AP Transplantation of Human Organs Act, 1995 द्वारा शासित होता है, जो केंद्रीय कानून के अनुरूप है। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान में हो रहे तीव्र विकास और उभरती नैतिक चुनौतियों को देखते हुए, राज्य कानून में संशोधन करना अनिवार्य हो गया था ताकि यह केंद्रीय 2011 के संशोधनों के साथ पूरी तरह तालमेल बिठा सके।

कानूनी ढांचे का विस्तार

पुराने कानून का मुख्य ध्यान केवल मानव अंगों पर था, लेकिन नए संशोधनों के बाद अब इसमें मानव ऊतकों (tissues) जैसे कि त्वचा, कॉर्निया, हार्ट वाल्व, टेंडन और बोन मैरो को भी शामिल कर लिया गया है। इससे अब चिकित्सा उपचार के दायरे में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।

यह संशोधन न केवल चिकित्सा प्रक्रियाओं को सुगम बनाएगा, बल्कि अंगों के दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

बदलाव और प्रभाव: BozokMedia विश्लेषण

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि इस कानून के माध्यम से 'निकट संबंधी' (near relative) की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। अब इसमें दादा-दादी, नाना-नानी और पोते-पोती भी शामिल हैं। इसका सीधा लाभ यह होगा कि जीवित दाताओं का एक बड़ा समूह कानूनी रूप से उपलब्ध होगा, जिससे जटिल अनुमोदन प्रक्रियाओं के बिना प्रत्यारोपण की संभावना बढ़ेगी।

इसके अतिरिक्त, 'स्वैप डोनेशन' (Swap Donation) की सुविधा भी पेश की गई है। यदि दो परिवारों में अंग असंगति (incompatibility) है, तो वे अपने दाताओं को आपस में 'स्वैप' कर सकते हैं ताकि दोनों प्राप्तकर्ताओं को सफल प्रत्यारोपण मिल सके। यह परिवारों के भीतर जीवन रक्षक अवसर प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सुरक्षा और नैतिकता

कानून में कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए कड़े सुरक्षा उपाय किए गए हैं। मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों से अंगों को निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध है और नाबालिगों के दान पर भी सख्त सीमाएं लगाई गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुरुपयोग रोकने के लिए, विदेशी नागरिकों के मामले में प्राधिकरण समिति (Authorisation Committee) की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।

Did You Know?: 'स्वैप डोनेशन' तकनीक उन जोड़ों के लिए वरदान है जहाँ रक्त समूह या ऊतक प्रकार मेल नहीं खाते, जिससे दोनों पक्षों को जीवनदान मिल सकता है।

Frequently Asked Questions

1. इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य अंगों की मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करना और अवैध अंगों की तस्करी को रोकना है।

2. 'स्वैप डोनेशन' क्या है?
यह दो असंगत दाता-प्राप्तकर्ता जोड़ों को अपने दाताओं को बदलने की अनुमति देता है ताकि दोनों को सफल प्रत्यारोपण मिल सके।