आंध्र प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों और सरकार के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद हड़ताल जारी रखने का फैसला किया गया है। आंध्र प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (APJUDA) ने सरकार के 3% स्टाइपेंड बढ़ोतरी के प्रस्ताव को महंगाई के मुकाबले नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया है।
- APJUDA ने सरकार के 3% वार्षिक स्टाइपेंड बढ़ोतरी के प्रस्ताव को महंगाई के खिलाफ अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया है।
- हड़ताल अपने दसवें दिन में प्रवेश कर चुकी है, और पिछले चार दिनों से आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह से बंद हैं।
- डॉक्टरों ने लचीलापन दिखाते हुए अपनी द्विवार्षिक स्टाइपेंड संशोधन मांग को 30% से घटाकर 20% कर दिया है।
आंध्र प्रदेश सरकार और जूनियर डॉक्टरों के बीच चल रहा गतिरोध और गहरा गया है क्योंकि हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में कोई समाधान नहीं निकल सका। गुरुवार को आंध्र प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (APJUDA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सचिवालय में स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण मंत्री सत्य कुमार यादव से मुलाकात की। डॉक्टरों की चिंताओं पर लंबी चर्चा के बावजूद, एसोसिएशन ने घोषणा की कि जब तक उनकी मुख्य मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह द्विवार्षिक स्टाइपेंड (वजीफा) में बढ़ोतरी का मुद्दा है। राज्य सरकार ने वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए पहले से लागू 15% द्विवार्षिक स्टाइपेंड बढ़ोतरी को जारी रखने में असमर्थता जताई है। इसके बजाय, स्वास्थ्य सचिव जी. वीरपांडियन ने जूनियर डॉक्टरों के लिए 3% और इंटर्न के लिए 5% वार्षिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा। APJUDA ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए तुरंत खारिज कर दिया कि यह मामूली वृद्धि मौजूदा महंगाई दर की भरपाई के लिए बेहद अपर्याप्त है।
बातचीत के प्रति अपनी गंभीरता दिखाते हुए, हड़ताली डॉक्टरों ने अपनी शुरुआती मांग को 30% द्विवार्षिक संशोधन से घटाकर 20% कर दिया। डॉक्टरों का तर्क है कि उनकी मांगों का वित्तीय प्रभाव राज्य के स्वास्थ्य बजट की तुलना में बहुत कम है। APJUDA के अनुसार, 15% स्टाइपेंड वृद्धि से राज्य पर सालाना ₹87.91 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 के कुल स्वास्थ्य बजट का केवल 0.5% और कुल राज्य बजट का मात्र 0.03% है।
| स्टाइपेंड घटक | सरकार का प्रस्ताव | डॉक्टरों की संशोधित मांग |
|---|---|---|
| वार्षिक / द्विवार्षिक वृद्धि दर | 3% वार्षिक (इंटर्न के लिए 5% वार्षिक) | 20% द्विवार्षिक (30% से घटाकर) |
| वित्तीय प्रभाव (अनुमानित) | राज्य की देनदारियों में मामूली वृद्धि | ₹87.91 करोड़ (राज्य के कुल बजट का लगभग 0.03%) |
| महंगाई क्षतिपूर्ति | APJUDA द्वारा अत्यधिक अपर्याप्त माना गया | वर्तमान महंगाई दर के साथ तालमेल बिठाना |
वित्तीय मांगों के अलावा, जूनियर डॉक्टर अन्य नीतिगत फैसलों का भी विरोध कर रहे हैं। इनमें मेडिकल फैकल्टी की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने का प्रस्ताव और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के दिशानिर्देशों के उल्लंघन में नियुक्तियों के मुद्दे शामिल हैं। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि सेवानिवृत्ति की आयु और NMC दिशानिर्देशों से संबंधित चिंताओं का समाधान किया जाएगा, लेकिन स्टाइपेंड पर बना गतिरोध अभी भी सबसे बड़ी बाधा है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि जूनियर डॉक्टरों की लंबी हड़ताल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, खासकर तब जब आपातकालीन सेवाएं भी वापस ले ली जाएं। सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का भारी दबाव होने के कारण, यह गतिरोध एक गहरे प्रणालीगत संकट को दर्शाता है: मुद्रास्फीति के इस दौर में राज्य के वित्तीय अनुशासन और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के उचित मुआवजे के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
"अग्रिम पंक्ति के चिकित्सा पेशेवरों से वित्तीय तनाव के बीच उच्च गुणवत्ता वाली सेवा की उम्मीद नहीं की जा सकती; सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को बनाए रखने के लिए महंगाई के अनुकूल स्टाइपेंड बेहद जरूरी है।"
यह हड़ताल अब अपने दसवें दिन में प्रवेश कर चुकी है, जिससे आंध्र प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। पिछले चार दिनों से जूनियर डॉक्टरों, सीनियर रेजिडेंट्स और इंटर्न ने आपातकालीन सेवाओं से भी खुद को पूरी तरह दूर कर लिया है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। विजयवाड़ा के गवर्नमेंट सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज सहित विभिन्न संस्थानों में डॉक्टरों द्वारा कैंडललाइट मार्च और धरने लगातार जारी हैं।
Frequently Asked Questions
Q1: आंध्र प्रदेश में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर क्यों हैं?
A1: जूनियर डॉक्टर मुख्य रूप से इसलिए हड़ताल पर हैं क्योंकि सरकार ने 15% द्विवार्षिक स्टाइपेंड बढ़ोतरी लागू करने से इनकार कर दिया है और केवल 3% वार्षिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जिसे डॉक्टर महंगाई के मुकाबले नाकाफी मान रहे हैं।
Q2: इस हड़ताल से कौन सी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं?
A2: हड़ताल के दसवें दिन में प्रवेश करने के साथ ही ओपीडी (OPD) सेवाओं के साथ-साथ आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।