डॉ. सुनील कुमार हेब्बी ने निजी अस्पतालों के मुनाफे के खेल को त्याग कर एक मोबाइल क्लीनिक के माध्यम से गरीबों तक मुफ्त स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने अब तक 1.5 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया है।
- डॉ. सुनील कुमार हेब्बी ने निजी अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनावश्यक सर्जरी के खिलाफ आवाज़ उठाई।
- 2010 में एक सड़क दुर्घटना ने उनके जीवन का उद्देश्य बदल दिया।
- उनकी 'मातृ श्री फाउंडेशन' के माध्यम से अब तक 1.5 लाख से अधिक गरीब मरीजों का इलाज हो चुका है।
- वे आपदा राहत कार्यों (केरल, चेन्नई बाढ़) में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
बेंगलुरु की गलियों में कहीं एक वैन रुकती है, जिसके अंदर एक छोटा सा अस्पताल है। यह कोई साधारण वैन नहीं, बल्कि डॉ. सुनील कुमार हेब्बी का चलता-फिरता क्लिनिक है। एक डॉक्टर, जिसने आलीशान निजी अस्पतालों की सुख-सुविधाओं को ठुकरा दिया ताकि वह उन लोगों तक पहुँच सके जो अस्पताल की दहलीज तक भी नहीं पहुँच सकते।
डॉ. हेब्बी का सफर 2007 में एमबीबीएस पूरा करने के बाद निजी अस्पतालों में काम करने से शुरू हुआ था। लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हुआ कि स्वास्थ्य सेवा अब सेवा नहीं, बल्कि एक व्यवसाय बन चुकी है। उन्होंने देखा कि कैसे अस्पताल 'यशस्विनी कार्ड' जैसे सरकारी बीमा का लाभ उठाने के लिए मरीजों को अनावश्यक सर्जरी और भर्ती के लिए मजबूर करते थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में स्वास्थ्य सेवा का निजीकरण अक्सर गरीब तबके के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। डॉ. हेब्बी ने इसी विसंगति को पहचाना। उन्होंने महसूस किया कि अस्पतालों का उद्देश्य जनता की सेवा करना होना चाहिए, न कि केवल मुनाफा कमाना।
"मैंने देखा कि निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा से ज्यादा व्यापार हो रहा था। मैं उस भ्रष्टाचार का हिस्सा नहीं बनना चाहता था," डॉ. हेब्बी कहते हैं।
उनके जीवन में निर्णायक मोड़ 2010 में आया, जब उन्होंने होसुर रोड पर एक सड़क दुर्घटना में एक युवक की जान बचाने में मदद की। उस पीड़ित की माँ ने जब उन्हें धन्यवाद दिया, तो डॉ. हेब्बी ने तय किया कि वे अपनी कार को ही एक क्लिनिक में बदल देंगे।
आज, उनकी संस्था मातृ श्री फाउंडेशन के माध्यम से 200 से अधिक चिकित्सा स्वयंसेवक और 500 गैर-चिकित्सा स्वयंसेवक काम कर रहे हैं। उन्होंने न केवल बेंगलुरु के स्लम इलाकों में, बल्कि केरल और चेन्नई की बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी अपनी सेवाएं दी हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा हमेशा से एक चुनौती रही है। सरकारी योजनाओं जैसे 'यशस्विनी' का उद्देश्य गरीबों को राहत देना था, लेकिन निजी क्षेत्र द्वारा इसके दुरुपयोग ने डॉ. हेब्बी जैसे समर्पित डॉक्टरों को जमीनी स्तर पर काम करने के लिए प्रेरित किया।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: डॉ. हेब्बी की मोबाइल क्लिनिक सेवा क्या है?
उत्तर: यह एक वैन आधारित चिकित्सा सेवा है जो स्लम बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर मुफ्त या बहुत कम शुल्क पर इलाज प्रदान करती है।
प्रश्न 2: मातृ श्री फाउंडेशन क्या करता है?
उत्तर: यह संस्था वृद्धाश्रमों, सरकारी स्कूलों और झुग्गी बस्तियों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करती है और आपदा के समय राहत कार्य करती है।