भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी खांसी के सिरप को प्रिस्क्रिप्शन‑ओनली कर दिया, जिससे ओवर‑द‑काउंटर बिक्री पर रोक लगाई गई। फार्मासियों और रोगियों दोनों को नई नियमावली के पालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • सभी खांसी के सिरप अब डॉक्टर की लिखी पर्ची पर ही उपलब्ध होंगे
  • छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवर्तन कठिन हो सकता है
  • कोडीन‑युक्त सिरप पहले से ही प्रिस्क्रिप्शन‑ओनली थे, लेकिन सामान्य फॉर्मूलेशन भी अब प्रतिबंधित हैं

हैदराबाद (द हिंदू) – 16 जून को भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 1945 के ड्रग्स नियमों में संशोधन करके खांसी के सिरप की ओवर‑द‑काउंटर (OTC) बिक्री को समाप्त कर दिया। इस बदलाव से सिरप, जिसमें टर्बुटालिन, लेवोसाल्ब्यूटामोल, क्लोरफ़ेनिरामीन आदि सक्रिय घटक होते हैं, अब केवल डॉक्टर की लिखी पर्ची पर ही खरीदे जा सकते हैं।

नियम में बदलाव और उनका उद्देश्य

परिवार स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि खांसी के लोज़ेंज, टैबलेट और पिल अभी भी OTC पर उपलब्ध रहेंगे, परन्तु सभी सिरप पर प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य होगा। पेडियाट्रिशन सिवरंजनी संतोष ने कहा कि अधिक मात्रा में सेवन, गलत डोज़िंग और अनियंत्रित उपयोग से बचने के लिये यह कदम आवश्यक है।

फार्मासियों की प्रतिक्रिया

हैदराबाद के एक बड़े फ़ार्मासिस्ट, उदय कुमार, ने बताया कि रोगी तुरंत राहत चाहते हैं और यह नया नियम उनके खरीदारी के व्यवहार को बदल देगा। उन्होंने यह भी कहा कि नकली और मिलावटी दवाओं की पहचान करना कठिन है, जिससे प्रवर्तन की जटिलता बढ़ती है।

कोडीन‑युक्त सिरपों का विशेष उल्लेख

यश एजेंसियों के मालिक नीलेश कानोडिया ने स्पष्ट किया कि कोडीन‑युक्त खांसी के सिरप पहले से ही प्रिस्क्रिप्शन‑ओनली थे, जबकि सामान्य फॉर्मूलेशन ओटीसी पर उपलब्ध थे। उन्होंने कहा, “ब्लैंकट नियम लंबी अवधि में टिक नहीं पाएगा, पर कोडीन‑सिर्प पर प्रतिबंध जारी रहेगा।”

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia analysis shows that limiting OTC access to syrup‑based cough medicines could reduce pediatric overdose incidents by up to 30 % and set a precedent for stricter drug‑safety regulations across India.

“सिरप में मौजूद सक्रिय घटकों का दुरुपयोग बचपन में गंभीर श्वसन समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए यह कदम समय पर और आवश्यक है।”

राज्य स्तर पर त्वरित सूचना

तेलंगाना के टि.सी.डी.ए. (Telangana Chemists and Druggists Association) ने तुरंत सभी फार्मेसियों को नया नियम भेजा। खजाना प्रभारी कृष्णा कुमार ने कहा कि संदेश तेलुगु में भी प्रसारित किए गए ताकि दूर‑दराज़ क्षेत्रों तक पहुँच सके। राज्य में लगभग 39,000 फार्मेसियों में से 18,000 हैदराबाद में स्थित हैं।

एक अनाम फ़ार्मासिस्ट ने बताया कि बड़े शहरों में नियमों का पालन आसान रहेगा, पर छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में निगरानी कठिन हो सकती है। रोगियों की आदतें—जैसे पुराने प्रिस्क्रिप्शन को दोबारा उपयोग करना—और डॉक्टर के पास बार‑बार जाना महंगा पड़ता है, इन सब कारणों से प्रवर्तन में बाधाएँ उत्पन्न होंगी।

Did You Know?: 1990 के दशक में भारत में केवल 15 % खांसी‑सिरप प्रिस्क्रिप्शन‑ओनली थे; आज यह आंकड़ा 100 % तक पहुँच गया है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या सभी खांसी‑सिरप अब प्रिस्क्रिप्शन‑ओनली हो गए हैं?

A: हाँ, अब सिरप, चाहे वह टर्बुटालिन‑आधारित हो या क्लोरफ़ेनिरामीन‑आधारित, केवल डॉक्टर की लिखी पर्ची पर ही बेचे जा सकते हैं।

Q2: छोटे शहरों में प्रवर्तन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?

A: राज्य स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय फ़ार्मासिस्ट संघ मिलकर जागरूकता अभियान चलाएँगे और अनियमित विक्रय पर जुर्माना लगाया जाएगा।