केरल हाई कोर्ट ने राज्य को 'मेंटल हेल्थ सेंटर' के नाम को बदलने की सिफारिश करने का निर्देश दिया, क्योंकि यह शब्द सामाजिक कलंक को बढ़ावा देता है। न्यायालय ने इस निर्णय को नीति‑निर्धारण के रूप में माना, जिससे मरीजों के अधिकार सुरक्षित हों।

  • केरल हाई कोर्ट ने 'मेंटल हेल्थ सेंटर' के नाम पर पुनर्विचार का आदेश दिया।
  • अमिकस क्यूरिए ने 'इंस्टिट्यूट्स ऑफ बिहेवियरल मैनेजमेंट' नाम प्रस्तावित किया।
  • नाम परिवर्तन का लक्ष्य मानसिक रोगियों के खिलाफ कलंक को कम करना है।

केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरे राज्य में ‘मेंटल हेल्थ सेंटर’ के नाम को पुनः विचार करने के लिए सुझाव एकत्रित करें। दो न्यायाधीशों की डिवीजन बेंच, जस्टिस देवांग रामचंद्रन और जस्टिस बसंत बालाजी, ने यह मानते हुए कहा कि समान अस्पतालों को ‘सेंटर्स ऑफ फ़िजिकल हेल्थ’ नहीं कहा जाता, इसलिए इस प्रकार के नामकरण से अनावश्यक सामाजिक कलंक उत्पन्न होता है।