केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिपमेर के आगामी विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और अंग प्रत्यारोपण एवं ट्रॉमा केयर केंद्रों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की है।
- जिपमेर में ₹1,000 करोड़ की लागत से नए चिकित्सा केंद्रों का निर्माण।
- सेदरपेट में ₹425 करोड़ का ट्रॉमा केयर और पुनर्वास केंद्र।
- ₹550 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक अंग प्रत्यारोपण केंद्र की योजना।
- स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव विजय नेहरा द्वारा स्थल निरीक्षण।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जवाहरलाल संस्थान स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान (JIPMER) द्वारा शुरू की जा रही प्रमुख परियोजनाओं की गहन समीक्षा की है। इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य पुडुचेरी में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना और संस्थान की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव, विजय नेहरा ने हाल ही में जिपमेर परिसर का दौरा किया और संस्थान के चल रहे और आगामी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल के कामकाज, नैदानिक सेवाओं को मजबूत करने और उन्नत रोगी देखभाल प्रदान करने की क्षमता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विकास?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जिपमेर में प्रस्तावित ये परियोजनाएं न केवल पुडुचेरी बल्कि पूरे दक्षिण भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित होंगी। ₹1,000 करोड़ का यह निवेश क्षेत्रीय स्तर पर उन्नत चिकित्सा सेवाओं की पहुंच को सुलभ बनाएगा।
इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना दक्षिण भारत में जटिल चिकित्सा उपचारों के लिए एक नया युग शुरू करेगा।
समीक्षा के दौरान, श्री नेहरा ने सेदरपेट में स्थित 51 एकड़ भूमि का भी दौरा किया, जिसे अंग प्रत्यारोपण और ट्रॉमा केयर केंद्रों के लिए आरक्षित किया गया है। जिपमेर के निदेशक वीर सिंह नेगी और वरिष्ठ संकाय सदस्य इस महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा थे।
सेदरपेट परियोजनाओं का विवरण
सेदरपेट में दो प्रमुख केंद्र विकसित किए जा रहे हैं:
| सुविधा का नाम | अनुमानित लागत | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|
| ट्रॉमा केयर एवं पुनर्वास केंद्र | ₹425 करोड़ | 250 बेड, एयर एम्बुलेंस, 10 ऑपरेशन थिएटर |
| अंग प्रत्यारोपण केंद्र | ₹550 करोड़ | 400 बेड, ट्रांसप्लांट साइंस हब, 14 ऑपरेशन थिएटर |
ट्रॉमा केयर केंद्र में गहन देखभाल इकाइयां (ICU), उच्च-निर्भरता इकाइयां (HDU) और समर्पित ट्रॉमा बे शामिल होंगे। वहीं, अंग प्रत्यारोपण केंद्र को अंग और ऊतक प्रत्यारोपण के लिए एक व्यापक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जिपमेर (JIPMER) को भारत सरकार द्वारा एक संस्थान के रूप में स्थापित किया गया था और यह देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक है। समय के साथ, इसकी भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह जटिल सर्जरी और उन्नत अनुसंधान का केंद्र बन गया है।
Frequently Asked Questions
1. जिपमेर के नए प्रोजेक्ट्स की कुल लागत कितनी है?
इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹1,000 करोड़ है।
2. ये नए केंद्र कहाँ बनाए जा रहे हैं?
ये नए केंद्र पुडुचेरी के सेदरपेट क्षेत्र में विकसित किए जा रहे हैं।