भारत में आयुष (AYUSH) चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन सरकारी कॉलेजों की तुलना में निजी संस्थानों की संख्या काफी अधिक है। 2021 से 2024 के बीच कॉलेजों की संख्या में 23% की वृद्धि देखी गई है।

  • 2021 से 2024 के बीच आयुष कॉलेजों की संख्या 789 से बढ़कर 971 हो गई है।
  • कुल प्रवेश क्षमता में लगभग 25% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसे क्षेत्रों में 85% से अधिक कॉलेज निजी क्षेत्र के हैं।
  • केंद्र सरकार ने 'आयुर्ज्ञान' योजना के तहत बजट में भारी बढ़ोतरी की है।

भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में आयुष (AYUSH) की भूमिका को व्यापक बनाने के प्रयासों के बीच, देश के आयुष चिकित्सा शिक्षा ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार देखा जा रहा है। हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) के कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

निजी संस्थानों का वर्चस्व

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि शिक्षा के इस विस्तार का मुख्य श्रेय निजी संस्थानों को जाता है। 2021 में आयुष कॉलेजों की कुल संख्या 789 थी, जो 2024 तक बढ़कर 971 हो गई है, जो लगभग 23% की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि, इस वृद्धि का स्वरूप चिंताजनक है क्योंकि अधिकांश संस्थान गैर-सरकारी हैं।

उदाहरण के तौर पर, अप्रैल 2024 तक पंजीकृत 541 आयुर्वेद कॉलेजों में से 467 (लगभग 86%) निजी संस्थान थे। इसी तरह, होम्योपैथी के क्षेत्र में भी 277 में से 236 कॉलेज निजी हाथों में हैं। यूनानी और सिद्ध चिकित्सा में भी यही पैटर्न देखा गया है, जहां सरकारी कॉलेजों की संख्या बहुत सीमित है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि आयुष शिक्षा का निजीकरण स्वास्थ्य सेवा के लोकतंत्रीकरण और लागत पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। यदि शिक्षा का बड़ा हिस्सा निजी संस्थानों के पास है, तो भविष्य में चिकित्सा शुल्क और पहुंच पर नियंत्रण बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है।

आयुष शिक्षा का निजीकरण बुनियादी ढांचे को तेजी से बढ़ाने में मदद करता है, लेकिन गुणवत्ता और सामर्थ्य सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रवेश क्षमता की बात करें तो, 2021 में यह 63,477 थी जो 2024 में बढ़कर 79,593 हो गई है। हालांकि, सीटों के आवंटन में असमानता भी देखी गई है। जहाँ आयुर्वेद में लगभग सभी सीटें भरी जा रही हैं, वहीं होम्योपैथी में रिक्तियों की संख्या अधिक है।

बजट और सरकारी सहायता

केंद्र सरकार ने आयुष शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 'आयुर्ज्ञान' (AYURGYAN) योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता में वृद्धि की है। बजट आवंटन 2021-22 में ₹8.42 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹48.5 करोड़ तक पहुँच गया है। यह फंड न केवल शिक्षा बल्कि अनुसंधान और नवाचार के लिए भी उपयोग किया जा रहा है।

प्रणाली (System)कुल कॉलेज (2024)निजी कॉलेजों का प्रतिशत (लगभग)
आयुर्वेद54186%
होम्योपैथी27785%
यूनानी5873%
योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा7179%
Did You Know?: आयुष का अर्थ है आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी का संगम।

Frequently Asked Questions

1. आयुष शिक्षा में किस प्रणाली का सबसे अधिक विस्तार हुआ है?
आंकड़ों के अनुसार, आयुर्वेद में सबसे अधिक कॉलेजों और छात्रों की संख्या देखी गई है।

2. क्या आयुष शिक्षा के लिए सरकारी बजट बढ़ रहा है?
हाँ, 'आयुर्ज्ञान' योजना के तहत बजट में पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।