बेंगलुरु में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा है कि एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी की सफलता के कारण एचआईवी रोगी अब लंबा जीवन जी रहे हैं, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ गया है। अब एचआईवी उपचार के साथ हृदय देखभाल को भी जोड़ना आवश्यक है।
- एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) के कारण एचआईवी रोगियों की जीवन प्रत्याशा बढ़ी है।
- लंबी आयु के साथ हृदय रोगों (Cardiovascular diseases) का जोखिम अधिक हो गया है।
- श्री जयदेव संस्थान ने अब तक 1,200 से अधिक एचआईवी रोगियों का हृदय उपचार किया है।
- रक्त प्रबंधन के डर से कई अस्पताल एचआईवी रोगियों का हृदय उपचार करने में हिचकिचाते हैं।
बेंगलुरु: चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है कि एचआईवी (HIV) के साथ जी रहे लोगों के दीर्घकालिक उपचार में अब हृदय स्वास्थ्य देखभाल (Cardiac care) को एक अभिन्न अंग बनाना होगा। 'एचआईवी एंड हार्ट सिम्पोजियम 2026' के दौरान, जो श्री जयदेव संस्थान ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च द्वारा आयोजित किया गया था, विशेषज्ञों ने इस उभरते स्वास्थ्य संकट पर चर्चा की।
बदलती स्वास्थ्य चुनौतियाँ
जयदेव संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एच.एस. नटराज सेट्टी ने बताया कि एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी की सफलता ने एचआईवी देखभाल के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा, "एचआईवी से पीड़ित लोग अब लंबा और स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम हैं। जैसे-जैसे उनकी जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, हमें हृदय स्वास्थ्य और अन्य दीर्घकालिक जटिलताओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।"
संस्थान के निदेशक बी. दिनेश ने जोर देकर कहा कि हृदय रोग एचआईवी रोगियों के बीच एक प्रमुख स्वास्थ्य चिंता बन सकता है। इसके लिए शुरुआती पहचान, उचित जांच और समय पर उपचार की अत्यंत आवश्यकता है।
भारत की चार दशकों की यात्रा
संगोष्ठी में भारत के एचआईवी प्रतिक्रिया के विकास का भी विश्लेषण किया गया। पीपल्स हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के महासचिव ईश्वर गिलडा ने बताया कि 1980 के दशक के शुरुआती प्रयासों से लेकर आज तक, भारत ने किफायती जेनेरिक दवाओं के माध्यम से वैश्विक स्तर पर एक मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि सस्ती दवाओं की उपलब्धता ने अफ्रीका सहित संसाधन-सीमित देशों में उपचार के अंतर को पाटने में मदद की है।
उपचार में आने वाली बाधाएं
नारायणा हेल्थ के चेयरमैन डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने एक गंभीर समस्या की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि कई अस्पताल एचआईवी रोगियों के रक्त को संभालने के दौरान संक्रमण के जोखिम के कारण उनके हृदय उपचार में संकोच करते हैं। हालांकि, उन्होंने जयदेव संस्थान की सराहना की, जिसने इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए 1,200 से अधिक ऐसे मरीजों का सफल उपचार किया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चिकित्सा जगत अब केवल संक्रमण को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और दीर्घकालिक सह-रुग्णता (comorbidities) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। एचआईवी और हृदय रोग का यह मेल भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
एचआईवी उपचार की सफलता ने हमें एक नई चुनौती दी है: संक्रमण को हराना तो संभव हुआ, लेकिन अब हृदय रोगों से लड़ना अनिवार्य है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एचआईवी रोगियों में हृदय रोग का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर: एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के कारण एचआईवी रोगियों की आयु बढ़ रही है, जिससे उम्र से संबंधित हृदय संबंधी जटिलताएं अधिक दिखने लगी हैं।
प्रश्न 2: क्या सभी अस्पताल एचआईवी रोगियों का हृदय उपचार करते हैं?
उत्तर: नहीं, रक्त प्रबंधन के दौरान संक्रमण के डर से कुछ अस्पताल हिचकिचाते हैं, लेकिन जयदेव जैसे संस्थान इसमें विशेषज्ञता रख रहे हैं।