चेन्नई में आयोजित इंडियन चेस्ट कांग्रेस 2026 में विशेषज्ञों ने 'प्रिसिजन पल्मोनोलॉजी' के माध्यम से श्वसन रोगों से लड़ने की रणनीति तैयार की। इस सम्मेलन में AI, डिजिटल स्वास्थ्य और फेफड़ों के प्रत्यारोपण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

  • इंडियन चेस्ट कांग्रेस 2026 का आयोजन चेन्नई के IIT मद्रास रिसर्च पार्क में किया गया।
  • सम्मेलन का मुख्य विषय 'लचीले भारत के लिए प्रिसिजन पल्मोनोलॉजी' रखा गया है।
  • AI, डिजिटल स्वास्थ्य और ECMO जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में श्वसन रोगों की रोकथाम और शीघ्र पहचान पर जोर दिया गया।

चेन्नई के IIT मद्रास रिसर्च पार्क में शनिवार को 'इंडियन चेस्ट कांग्रेस 2026' का भव्य शुभारंभ हुआ। SPICE इंडिया (सोसाइटी फॉर पल्मोनोलॉजी, इंटरवेंशन, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप) द्वारा आयोजित यह वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन श्वसन स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों और चुनौतियों को संबोधित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बना है।

इस वर्ष के सम्मेलन का विषय 'लचीले भारत के लिए प्रिसिजन पल्मोनोलॉजी' (Precision Pulmonology for a Resilient India) रखा गया है। कौवेरी हॉस्पिटल्स के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के पल्मोनोलॉजिस्ट, श्वसन विशेषज्ञ, गहन देखभाल विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए हैं। सम्मेलन का उद्देश्य चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक प्रगति को भारत की वास्तविक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के साथ जोड़ना है।

तकनीकी नवाचार और भविष्य की राह

सम्मेलन के दौरान चिकित्सा जगत के उभरते क्षेत्रों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल स्वास्थ्य, प्रिसिजन मेडिसिन और उन्नत ब्रोंकोस्कोपी पर गहन चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने ECMO (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) और फेफड़ों के प्रत्यारोपण (Lung Transplantation) जैसी जीवन रक्षक तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया। इसके साथ ही, श्वसन प्रक्रियाओं पर व्यावहारिक कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।

श्वसन रोगों के बढ़ते बोझ को देखते हुए, हमें तकनीक और जमीनी स्तर के उपचार के बीच की दूरी को कम करना होगा।

तमिलनाडु के ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में श्वसन रोगों की रोकथाम और उनका शीघ्र पता लगाना अत्यंत आवश्यक है। वहीं, स्वास्थ्य सचिव दारेज़ अहमद ने सरकारी और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया ताकि जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में रोग निगरानी को मजबूत किया जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में वायु प्रदूषण, टीबी और COPD (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के बढ़ते मामलों के कारण श्वसन संबंधी स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन गया है। आधुनिक तकनीक का समावेश इस संकट से निपटने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

SPICE इंडिया के अध्यक्ष और आयोजन सचिव कौशिक मुथु राजा मथिवनन ने बताया कि यह सम्मेलन भारत में टीबी और वायु प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने का एक प्रयास है।

Did You Know?: वायु प्रदूषण और धूम्रपान भारत में श्वसन रोगों के सबसे बड़े कारण हैं, जिससे फेफड़ों की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

Frequently Asked Questions

1. इंडियन चेस्ट कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य श्वसन चिकित्सा में हो रही प्रगति को भारत की स्वास्थ्य चुनौतियों, जैसे टीबी और वायु प्रदूषण, के समाधान के साथ जोड़ना है।

2. इस सम्मेलन में किन बीमारियों पर चर्चा की गई?
इसमें अस्थमा, टीबी, फेफड़ों का कैंसर, COPD और वायु प्रदूषण से संबंधित श्वसन विकारों पर चर्चा की गई।