चेन्नई के कुमारन अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम ने 29 वर्षीय आईटी पेशेवर के शरीर से 20 सेमी का दुर्लभ और घातक ट्यूमर निकालने के लिए 20 घंटे तक चली मैराथन सर्जरी की। यह जटिल प्रक्रिया एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति के कारण और भी चुनौतीपूर्ण थी।

  • 29 वर्षीय आईटी पेशेवर के पेट से 20x20x18 सेमी का घातक ट्यूमर निकाला गया।
  • सर्जरी में कुल 20 घंटे का समय लगा।
  • मरीज न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (NF1) नामक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति से पीड़ित था।
  • प्रोफेसर रिला और पी. कपिल नागराज के नेतृत्व में मल्टीडिसीप्लिनरी टीम ने सफलता पाई।

चेन्नई के किल्पौक स्थित कुमारन अस्पताल में चिकित्सा विज्ञान का एक अभूतपूर्व उदाहरण पेश किया गया है। डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम ने एक 29 वर्षीय आईटी पेशेवर के शरीर से एक अत्यंत दुर्लभ और उच्च-ग्रेड घातक (malignant) ट्यूमर को निकालने के लिए 20 घंटे तक चलने वाली एक मैराथन सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

यह ट्यूमर मेसेंटरी (आंतों को सहारा देने वाला ऊतक) की जड़ में विकसित हुआ था और इसका आकार लगभग 20×20×18 सेमी था। सर्जरी की जटिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह ट्यूमर क्षेत्र की तीन प्रमुख रक्त वाहिकाओं में से दो के बेहद करीब था, जिससे जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी।

सर्जरी की जटिलता और प्रक्रिया

सर्जिकल टीम ने न केवल ट्यूमर को निकाला, बल्कि पूर्ण सफलता सुनिश्चित करने के लिए टोटल पैन्क्रियाटोडुओडेनेक्टोमी (total pancreaticoduodenectomy) और स्प्लेनेक्टोमी (splenectomy) जैसी अत्यंत कठिन प्रक्रियाएं भी कीं। इस दौरान उन्नत सर्जिकल तकनीक और निरंतर निगरानी प्रणालियों का उपयोग किया गया ताकि मरीज की स्थिति स्थिर रहे।

मल्टीडिसीप्लिनरी टीम वर्क और उन्नत सर्जिकल तकनीक के बिना इतनी जटिल प्रक्रिया को अंजाम देना लगभग असंभव होता।

मरीज की स्थिति और अधिक जटिल थी क्योंकि वह न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (NF1) से पीड़ित था। यह एक वंशानुगत स्थिति है जो शरीर में विभिन्न प्रकार के ट्यूमर होने के जोखिम को बढ़ा देती है। इस आनुवंशिक पृष्ठभूमि ने डॉक्टरों के लिए चुनौती को और अधिक बढ़ा दिया था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की सफल सर्जरी चिकित्सा क्षेत्र में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाती है। जटिल मामलों में मल्टीडिसीप्लिनरी दृष्टिकोण (एनेस्थीसिया, संवहनी, और लिवर विशेषज्ञता का मेल) ही जीवन बचाने की कुंजी है। यह घटना दिखाती है कि कैसे आधुनिक तकनीक और अनुभवी सर्जनों का समन्वय दुर्लभ बीमारियों के प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

मरीज को प्रक्रिया के 10 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और वह जल्द ही सामान्य जीवन में लौटने की उम्मीद कर रहा है। इस पूरी सर्जरी का नेतृत्व प्रोफेसर रिला की टीम और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन पी. कपिल नागराज ने किया था।

Did You Know?: मेसेंटरी वह ऊतक है जो आपकी आंतों को पेट की दीवार से जोड़ता है और उन्हें सही स्थान पर बनाए रखता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (NF1) क्या है?
उत्तर: यह एक आनुवंशिक विकार है जो तंत्रिका ऊतकों में ट्यूमर के विकास का कारण बनता है।

प्रश्न 2: इस सर्जरी में कितने विशेषज्ञों की आवश्यकता थी?
उत्तर: इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया, संवहनी (vascular), लिवर ट्रांसप्लांट, रेडियोलॉजी और गहन देखभाल विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम शामिल थी।