विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ता स्क्रीन टाइम और बाहर खेलने की कमी बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) का मुख्य कारण बन रही है। उन्होंने जल्द जांच और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया है।

  • बच्चों में मायोपिया के बढ़ते मामलों के लिए अत्यधिक स्क्रीन टाइम और कम आउटडोर एक्टिविटी जिम्मेदार है।
  • सोशल मीडिया पर आंखों के स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने की सलाह दी गई है।
  • स्कूलों और सरकारों को बच्चों की आंखों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर नीतियां बनाने की जरूरत है।
  • नियमित आंखों की जांच और शुरुआती लक्षणों की पहचान महत्वपूर्ण है।

हाल ही में आयोजित एक वेबिनार में चिकित्सा विशेषज्ञों ने बच्चों में बढ़ते मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) के संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली, जिसमें अत्यधिक स्क्रीन का उपयोग और बाहरी वातावरण में समय की कमी शामिल है, बच्चों की दृष्टि को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

राधात्री नेत्रालय की नेत्र रोग विशेषज्ञ और विट्रोरेटिनल सर्जन डॉ. वसुमती वेदांतम ने माता-पिता को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक जानकारियों के प्रति सचेत रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर आंखों के स्वास्थ्य के लिए कई ऐसे उत्पादों और उपचारों का दावा किया जाता है जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। माता-पिता को केवल साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सलाह पर ही भरोसा करना चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल युग में बच्चों का शारीरिक विकास और दृष्टि स्वास्थ्य सीधे तौर पर उनके दैनिक स्क्रीन उपयोग से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन सकता है।

नारायणा नेत्रालय की पीडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ. वसुधा केममानु ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के लिए पर्याप्त समय बाहर (आउटडोर) बिताना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकारों और स्कूलों को मिलकर ऐसे वातावरण का निर्माण करना चाहिए जो बच्चों को प्राकृतिक रोशनी और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करे।

बच्चों की आंखों की सुरक्षा के लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि मायोपिया के लक्षणों को पहचानना कितना महत्वपूर्ण है। यदि बच्चा दूर की वस्तुओं को देखने में कठिनाई महसूस करता है या उसके देखने के व्यवहार में अचानक बदलाव आता है, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक रूप से, मायोपिया मुख्य रूप से वयस्कों की समस्या मानी जाती थी, लेकिन पिछले दो दशकों में वैश्विक स्तर पर बच्चों में इसके मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। इसे 'डिजिटल आई स्ट्रेन' और बदलती जीवनशैली का सीधा परिणाम माना जा रहा है।

Did You Know?: प्राकृतिक सूर्य का प्रकाश आंखों के विकास में मदद करता है और मायोपिया के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या स्क्रीन टाइम से वास्तव में मायोपिया होता है?
हाँ, अत्यधिक निकट दृष्टि वाला कार्य (जैसे फोन या टैबलेट का उपयोग) आंखों पर दबाव डालता है, जो मायोपिया के जोखिम को बढ़ा सकता है।

2. बच्चों के लिए दिन में कितना आउटडोर समय पर्याप्त है?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिदिन कम से कम 1-2 घंटे प्राकृतिक रोशनी में बाहर बिताना आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।