कन्याकुमारी जिला सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वच्छता कर्मचारियों ने वेतन कटौती और काम के दबाव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हड़ताल के कारण अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
- स्वच्छता कर्मियों ने ₹1,500 की अवैध वेतन कटौती का आरोप लगाया।
- अनुबंध के तहत काम के अलावा अन्य काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
- हड़ताल के कारण असरपल्लम सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सफाई व्यवस्था ठप।
कन्याकुमारी के असरपल्लम स्थित जिला सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब स्वच्छता कर्मचारियों ने काम बंद कर अस्पताल परिसर में ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि जिस निजी फर्म के माध्यम से उन्हें नियुक्त किया गया है, वह उनके साथ अन्याय कर रही है।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें अनुबंध के समय ₹18,500 मासिक वेतन का वादा किया गया था। हालांकि, पिछले तीन महीनों से बिना किसी ठोस कारण के प्रत्येक कर्मचारी के वेतन से ₹1,500 की कटौती की जा रही है। इस आर्थिक शोषण के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है।
कार्य के स्वरूप में बदलाव पर विवाद
वेतन के अलावा, कर्मचारियों ने काम के स्वरूप को लेकर भी गंभीर शिकायतें दर्ज की हैं। उनका कहना है कि उन्हें स्वच्छता कार्यों के लिए भर्ती किया गया था, लेकिन अब उन्हें अस्पताल में ऐसे अन्य कार्य करने के लिए मजबूर किया जा रहा है जिनसे वे परिचित नहीं हैं। यह न केवल उनके अनुबंध का उल्लंघन है, बल्कि उनकी कार्यक्षमता पर भी सवाल उठाता है।
ठेका प्रथा के तहत काम करने वाले श्रमिकों का शोषण अक्सर प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम होता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इस तरह की हड़तालें न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करती हैं, बल्कि अस्पताल के भीतर स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) के लिए भी बड़ा जोखिम पैदा करती हैं। यदि स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती है, तो अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
वर्तमान में, असरपल्लम अस्पताल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित है, जिससे अस्पताल प्रशासन और मरीजों दोनों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता सेवाओं का आउटसोर्सिंग (Outsourcing) एक सामान्य प्रक्रिया रही है, लेकिन अक्सर निजी ठेकेदारों द्वारा वेतन में कटौती और श्रमिकों के अधिकारों के हनन की खबरें आती रहती हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: स्वच्छता कर्मी किस बात से नाराज हैं?
उत्तर: वे वेतन में ₹1,500 की कटौती और मूल कार्य के अलावा अन्य काम करने के दबाव से नाराज हैं।
प्रश्न 2: इस हड़ताल का अस्पताल पर क्या असर पड़ा है?
उत्तर: अस्पताल में स्वच्छता और सफाई के कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं।