ICMR और केरल स्वास्थ्य विभाग के एक संयुक्त अध्ययन ने खुलासा किया है कि बिना क्लोरीन वाला कुएं का पानी अमीबिक मेनिनगोएन्सेफलाइटिस (AME) के मामलों का मुख्य कारण है। यह शोध राज्य में घरेलू जल स्रोतों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाता है।
- बिना क्लोरीन वाले कुएं के पानी का उपयोग करने वालों में AME का खतरा 2.95 गुना अधिक है।
- 2025 में केरल में रिपोर्ट किए गए अधिकांश मामले 'अकैन्थोअमीबा' (Acanthamoeba) के कारण थे, न कि केवल नेगलेरिया फाउलेरी के।
- अध्ययन के अनुसार, यदि कुएं के पानी के जोखिम को हटाया जाए, तो 34.2% मामलों को रोका जा सकता है।
केरल स्वास्थ्य विभाग और चेन्नई स्थित ICMR-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NIE) द्वारा किया गया एक हालिया केस-कंट्रोल अध्ययन राज्य में अमीबिक मेनिनगोएन्सेफलाइटिस (AME) के प्रसार पर गंभीर प्रकाश डालता है। यह अध्ययन पहली बार वैज्ञानिक प्रमाण प्रदान करता है कि केरल में घरेलू उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कुएं का पानी स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा जोखिम बन गया है। शोध के अनुसार, प्राकृतिक जल निकायों के संपर्क में आना और स्नान या चेहरे धोने के लिए गैर-क्लोरीनयुक्त पानी का उपयोग करना इस घातक बीमारी के प्राथमिक जोखिम कारक हैं।
अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नहाने या चेहरा धोने के लिए कुएं के पानी का उपयोग करते हैं, उनमें AME होने की संभावना 2.95 गुना अधिक होती है। यह आंकड़ा विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि केरल की एक बड़ी आबादी अभी भी पाइप से आने वाले क्लोरीनयुक्त सुरक्षित पानी के बजाय निजी या सार्वजनिक कुओं पर निर्भर है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह जोखिम पानी पीने से नहीं, बल्कि चेहरे, सिर या त्वचा के सीधे संपर्क से जुड़ा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह अध्ययन केवल एक चिकित्सा रिपोर्ट नहीं है, बल्कि केरल के बुनियादी ढांचे के लिए एक चेतावनी है। भारी वर्षा, बाढ़ और सीवेज संदूषण के कारण कुओं में 'फ्री-लिविंग अमीबा' (FLAs) की वृद्धि होती है। जब तक स्थानीय सरकारें साल भर कुओं के रखरखाव और नियमित क्लोरीनीकरण को प्राथमिकता नहीं देतीं, तब तक सार्वजनिक स्वास्थ्य पर यह खतरा बना रहेगा।
"गैर-क्लोरीनयुक्त कुएं के पानी का उपयोग AME के साथ स्वतंत्र रूप से जुड़ा हुआ है, जो केरल के लिए अत्यंत प्रासंगिक है जहाँ सुरक्षित पाइप जल आपूर्ति की पहुंच सीमित है।" - डॉ. आर. अरविंद, प्रमुख, संक्रामक रोग, तिरुवनंतपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज।
अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 1 जनवरी से 11 नवंबर के बीच 159 मामले सामने आए, जिनमें से 41 लोगों की मृत्यु हुई, जिससे मृत्यु दर 25.8% रही। दिलचस्प बात यह है कि आम धारणा के विपरीत, अधिकांश मामले (88.2%) अकैन्थोअमीबा (Acanthamoeba) के कारण थे, जबकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' (नेगलेरिया फाउलेरी) को अधिक प्रमुखता दी गई थी।
| अमीबा का प्रकार | पुष्टि किए गए मामले (%) | मृत्यु दर (%) |
|---|---|---|
| Acanthamoeba | 88.2% | 25.4% |
| Naegleria fowleri | 11.8% | 44.4% |
ऐतिहासिक रूप से, 2016 से 2024 के बीच केरल में केवल 45 मामले दर्ज किए गए थे। 2025 में आई यह अचानक वृद्धि बेहतर नैदानिक जागरूकता और आणविक निदान (Molecular Diagnostics) की उपलब्धता का परिणाम हो सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि मानसून और मानसून के बाद की अवधि में विशेष सावधानी बरतने और घरेलू जल स्रोतों के नियमित क्लोरीनीकरण की आवश्यकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या कुएं का पानी पीना खतरनाक है?
उत्तर: यह अध्ययन मुख्य रूप से चेहरे, नाक और त्वचा के संपर्क (जैसे नहाना या चेहरा धोना) से जुड़े जोखिमों पर केंद्रित है, न कि पानी पीने पर।
प्रश्न 2: AME से बचने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
उत्तर: घरेलू जल स्रोतों का नियमित क्लोरीनीकरण करना और चेहरे/नाक के संपर्क में आने वाले पानी की शुद्धता सुनिश्चित करना सबसे प्रभावी तरीका है।