मुंबई के लीलावती अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल प्रक्रिया के माध्यम से एक 77 वर्षीय मरीज के अनियमित दिल की धड़कन और स्ट्रोक के जोखिम को सफलतापूर्वक ठीक किया, जो गंभीर रक्तस्राव के कारण दवाएं नहीं ले सकते थे।

  • 77 वर्षीय मरीज को एट्रियल फिब्रिलेशन (AF) और गंभीर ब्लीडिंग की समस्या थी।
  • डॉक्टरों ने LAAO और PFA नामक दो उन्नत प्रक्रियाओं को एक ही सत्र में संयोजित किया।
  • मरीज अब जीवन भर के लिए ब्लड-थिनिंग दवाओं से मुक्त हो गया है।

मुंबई के जुहू निवासी जगदीप शाह, जिनकी उम्र 77 वर्ष है, के लिए स्ट्रोक से बचाव की दवाएं लेना ही उनके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गया था। बाईपास सर्जरी के बाद हार्ट फेल्योर के इतिहास वाले शाह को बार-बार एट्रियल फिब्रिलेशन (AF) के दौरे पड़ रहे थे, जिसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। डॉक्टरों ने उन्हें ब्लड-थिनिंग दवाएं दीं, लेकिन इसके परिणामस्वरूप उनके पेट के अल्सर से इतना गंभीर रक्तस्राव हुआ कि उन्हें बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता पड़ी।

चिकित्सकों के सामने एक कठिन चुनौती थी: यदि दवाएं बंद की जातीं, तो स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता, और यदि उन्हें जारी रखा जाता, तो जानलेवा ब्लीडिंग हो सकती थी। इस संकट का समाधान लीलावती अस्पताल और अनुसंधान केंद्र के कार्डियोलॉजिस्ट और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. धीरज गुप्ता के नेतृत्व में एक टीम ने निकाला।

प्रक्रिया का तकनीकी विवरण

डॉक्टरों ने एक ही सत्र में दो अलग-अलग कैथेटर-आधारित प्रक्रियाओं का उपयोग किया। पहली प्रक्रिया लेफ्ट एट्रियल अपेंडिजेज ऑक्लूजन (LAAO) थी। इसमें कमर की नस के माध्यम से एक पतला कैथेटर हृदय तक पहुँचाया गया और बाएं एट्रियम के एक छोटे पाउच (अपेंडिजेज) को एक प्लग जैसे उपकरण से सील कर दिया गया। यह वह स्थान है जहाँ AF के रोगियों में अक्सर रक्त के थक्के बनते हैं, जो मस्तिष्क तक पहुँचकर स्ट्रोक का कारण बनते हैं।

दूसरी प्रक्रिया पल्स्ड फील्ड एबलेशन (PFA) थी। इसमें असामान्य विद्युत संकेतों को रोकने के लिए उच्च-वोल्टेज विद्युत दालों (electrical pulses) का उपयोग किया गया। पारंपरिक थर्मल एबलेशन (गर्मी या ठंड) के विपरीत, PFA केवल लक्षित हृदय ऊतकों को प्रभावित करता है, जिससे असामान्य धड़कन पैदा करने वाली कोशिकाओं का नाश हो जाता है और निशान (scar tissue) बन जाते हैं जो गलत संकेतों को रोकते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला आधुनिक चिकित्सा में 'पर्सनलाइज्ड मेडिसिन' के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। जब मानक उपचार (जैसे ब्लड थिनर) मरीज की अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के कारण घातक हो जाते हैं, तो इस तरह के हाइब्रिड हस्तक्षेप जीवनरक्षक साबित होते हैं। यह प्रक्रिया न केवल स्ट्रोक के जोखिम को कम करती है, बल्कि मरीज के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार करती है।

"जगदीप शाह की उम्र और स्ट्रोक के जोखिमों ने एक अनूठी चुनौती पेश की थी; ब्लीडिंग की घटनाओं ने उन्हें जीवन भर ब्लड थिनर पर रहना असंभव बना दिया था।" - डॉ. धीरज गुप्ता

इस पूरी प्रक्रिया में लगभग डेढ़ घंटा लगा। सर्जरी के बाद, जगदीप शाह अब पूरी तरह से ब्लड-थिनिंग दवाओं से मुक्त हैं और उनके फॉलो-अप इमेजिंग में डिवाइस की स्थिति बिल्कुल सही पाई गई है।

क्या आप जानते हैं?: एट्रियल फिब्रिलेशन (AF) हृदय ताल की सबसे आम असामान्य स्थिति है, जो यदि अनुपचारित छोड़ दी जाए तो स्ट्रोक के जोखिम को पांच गुना तक बढ़ा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. LAAO प्रक्रिया क्या है?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हृदय के बाएं एट्रियम के उस हिस्से को सील कर दिया जाता है जहाँ रक्त के थक्के जमने की सबसे अधिक संभावना होती है।

2. PFA पारंपरिक एबलेशन से कैसे अलग है?
पारंपरिक एबलेशन गर्मी या ठंड का उपयोग करता है, जबकि PFA विद्युत ऊर्जा का उपयोग करता है, जो अधिक सटीक होता है और आस-पास के स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुँचाता है।