अभिनेता राहुल रॉय ने छह साल पहले ब्रेन स्ट्रोक का सामना करने के बाद अपनी जीवनशैली और आहार में आमूल-चूल परिवर्तन किया है। जहां रॉय अब सख्त जैन और वीगन डाइट का पालन कर रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों ने रिकवरी के वास्तविक कारणों पर रोशनी डाली है।

  • राहुल रॉय ने स्ट्रोक के बाद प्याज, लहसुन और डेयरी उत्पादों का त्याग कर सख्त वीगन और जैन आहार अपनाया।
  • अभिनेता अब अपने स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन नाश्ते और रात के खाने के साथ आठ दवाएं लेते हैं।
  • न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, विशिष्ट सब्जियों के त्याग से अधिक महत्वपूर्ण ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का नियंत्रण है।
  • धूम्रपान छोड़ना और दवाओं का नियमित सेवन दोबारा स्ट्रोक रोकने के लिए सबसे अनिवार्य है।

छह साल पहले एक गंभीर ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हुए अभिनेता राहुल रॉय ने हाल ही में अपने जीवन और आहार में आए बड़े बदलावों के बारे में बात की। रॉय ने याद किया कि स्ट्रोक के बाद उन्हें बोलने में काफी समस्या हुई थी और कई महीनों तक वे इस अनिश्चितता में थे कि क्या वे फिर से सामान्य रूप से चल और बोल पाएंगे।

अपनी रिकवरी के बाद, रॉय ने अपनी जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया। स्ट्रोक से पहले वे धूम्रपान करते थे और मांसाहार का सेवन करते थे, लेकिन अब वे एक सख्त वीगन और जैन आहार का पालन करते हैं। उन्होंने बताया, "अब मैं प्याज या लहसुन का सेवन नहीं करता... मैं केवल एक बहुत ही सख्त आहार का पालन करता हूं और साथ ही सुबह-शाम आठ दवाएं लेता हूं।"

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि अक्सर मशहूर हस्तियां अपनी रिकवरी का श्रेय विशिष्ट आहार पद्धतियों को देती हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि व्यक्तिगत विश्वास और चिकित्सकीय प्रमाणों में अंतर होता है। राहुल रॉय का अनुशासन सराहनीय है, लेकिन आम जनता को यह समझना चाहिए कि केवल कुछ खाद्य पदार्थों को छोड़ने से अधिक महत्वपूर्ण उन जोखिम कारकों को नियंत्रित करना है जो दोबारा स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।

ठाणे के जुपिटर अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. योगेश गोडगे का कहना है कि स्ट्रोक से उबरने की प्रक्रिया अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी जारी रहती है। उनके अनुसार, कोई भी एक विशिष्ट आहार मस्तिष्क की उस क्षति को नहीं बदल सकता जो स्ट्रोक के कारण हुई है। मुख्य लक्ष्य ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना होना चाहिए।

"ऐसा कोई मजबूत क्लिनिकल प्रमाण नहीं है जो यह दिखाए कि प्याज, लहसुन, चिकन या डेयरी से परहेज करने का स्ट्रोक के बाद न्यूरोलॉजिकल रिकवरी पर कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।"

डॉ. गोडगे ने स्पष्ट किया कि वीगन या जैन आहार तभी फायदेमंद होता है जब वह पोषण से भरपूर हो। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग पशु उत्पादों का त्याग करते हैं, उन्हें विटामिन B12, कैल्शियम, विटामिन D और आयरन की कमी से बचने के लिए सप्लीमेंट्स की आवश्यकता हो सकती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: स्ट्रोक रिकवरी के तरीके

ऐतिहासिक रूप से, स्ट्रोक के बाद का इलाज केवल फिजियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी तक सीमित था। लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान 'लाइफस्टाइल मेडिसिन' की ओर बढ़ गया है। इसमें 'वैस्कुलर रिस्क फैक्टर्स' (रक्त वाहिकाओं के जोखिम) को कम करने पर जोर दिया जाता है। सोडियम और प्रोसेस्ड शुगर को कम करना वैश्विक स्तर पर स्वीकृत है, लेकिन प्याज-लहसुन का त्याग एक व्यक्तिगत या आध्यात्मिक विकल्प है, चिकित्सीय आवश्यकता नहीं।

कारकव्यक्तिगत चुनाव (राहुल रॉय)क्लिनिकल सुझाव (न्यूरोलॉजिस्ट)
आहार प्रतिबंधप्याज, लहसुन, डेयरी का त्यागकम नमक, कम प्रोसेस्ड शुगर
प्रोटीन स्रोतसख्त वीगन/पौधों पर आधारितसंतुलित प्रोटीन (दालें/लीन मीट)
मुख्य फोकसआध्यात्मिक/आहार शुद्धताBP, कोलेस्ट्रॉल और शुगर नियंत्रण
जीवनशैलीधूम्रपान का पूर्ण त्यागधूम्रपान छोड़ना अनिवार्य है
क्या आप जानते हैं?: स्ट्रोक के बाद कई मरीजों को 'डिस्फेगिया' (Dysphagia) नामक समस्या होती है, जिसमें उन्हें निगलने में कठिनाई होती है और उन्हें विशेष बनावट वाला भोजन देना पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या प्याज और लहसुन छोड़ने से मस्तिष्क की रिकवरी में मदद मिलती है?
नहीं, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इन विशिष्ट सब्जियों को छोड़ने से न्यूरोलॉजिकल रिकवरी में सुधार होता है।

प्रश्न 2: स्ट्रोक सर्वाइवर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण जीवनशैली बदलाव क्या हैं?
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव धूम्रपान छोड़ना, वजन नियंत्रित करना, शराब का सेवन सीमित करना और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित पालन करना है।